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Suran ki Kheti ke Tips: सतना में सूरन यानी जिमीकंद की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही है. कम लागत, कम पानी और ज़्यादा मुनाफा देने वाली यह फसल सेहत के लिए भी जबरदस्त औषधीय गुण रखती है, जानिए पूरा फायदा….और पढ़ें
हाइलाइट्स
- सूरन की खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है.
- सूरन की फसल कम पानी में भी अच्छी उपज देती है.
- सूरन सेहत के लिए औषधीय गुणों से भरपूर है.
सूरन की खेती
मई-जून के बीच सूरन की रोपाई की जाती है और लगभग 9 से 12 महीनों में फसल तैयार हो जाती है. इसकी खासियत ये है कि इसे बहुत अधिक पानी की ज़रूरत नहीं होती इसलिए यह फसल सूखा प्रभावित इलाकों में भी अच्छी उपज देती है. कम लागत और कम मेहनत में सूरन की खेती से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
लोकल 18 से बात करते हुए खेती विशेषज्ञ विष्णु तिवारी ने बताया कि सूरन की खेती किसानों के लिए अमृत के समान है. साथ ही इसका नियमित सेवन पेट की तमाम समस्याओं को दूर करता है और यह बवासीर, लिवर, गैस, अल्सर और यहां तक कि जॉन्डिस जैसी बीमारियों में भी कारगर माना गया है. उन्होंने बताया कि पारंपरिक रूप से बवासीर के मरीजों को सूरन की सब्जी, अचार या कढ़ी के रूप में दिया जाता आ रहा है.
व्यवसायिक दृष्टि से भी कारगर
खेती के व्यवसायिक पक्ष की बात करें तो वर्तमान में सूरन का बाज़ार भाव 30 से 40 रुपये प्रति किलो चल रहा है. खेती विशेषज्ञों के अनुसार इसकी बुवाई गर्मियों में लगभग 2 इंच गहराई में की जाती है और 9 से 12 महीने बाद एक अच्छी उपज ली जा सकती है. ऐसे में सूरन न सिर्फ़ एक पारंपरिक सब्ज़ी है बल्कि किसानों के लिए आय का स्थायी साधन भी बनती जा रही है.