मोहन भागवत के बयान से ’75 पार वाले’ नेता परेशान! MP बीजेपी के प्रवक्ता बोले… गलत मतलब निकाला

मोहन भागवत के बयान से ’75 पार वाले’ नेता परेशान! MP बीजेपी के प्रवक्ता बोले… गलत मतलब निकाला


MP BJP: मध्य प्रदेश बीजेपी में एक बार फिर उम्र की सियासत चर्चा में है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान, “75 की उम्र के बाद संन्यास लेना चाहिए” के बाद प्रदेश के कई दिग्गज नेता असमंजस में हैं. खासकर वे नेता, जो आने वाले समय में निगम-मंडल की नियुक्ति या पार्टी की कार्यकारिणी में जगह पाने की उम्मीद लगाए बैठे थे. अब उनके सपनों पर ग्रहण लग सकता है.

मध्य प्रदेश इस समय करीब एक दर्जन ऐसे नेता हैं, जिनकी उम्र 75 वर्ष पार कर चुकी है. इसमें वर्तमान में मध्य प्रदेश भाजपा के विधायक नागेंद्र सिंह नागौद, जयंत मलैया, पन्नालाल शाक्य, जगन्नाथ सिंह रघुवंशी, गोपाल भार्गव, नागेंद्र सिंह गूढ़, जय सिंह मरावी, बिसाहूलाल साहू, अजय बिश्नोई, विश्वनाथ सिंह, प्रेम शंकर वर्मा, सीता शरण शर्मा, हजारीलाल रघुवंशी और मधु वर्मा के नाम शामिल हैं.

पहले भी काटे गए थे टिकट
बीजेपी ने इससे पहले भी ‘75 पार’ के फॉर्मूले को आधार बनाकर कई वरिष्ठ नेताओं के टिकट काटे हैं. 2018 विधानसभा चुनाव में सरताज सिंह, बाबूलाल गौर, कुसुम मेहदेले, मोती कश्यप, रमाकांत तिवारी, चेतराम मानेकर, रणजीत सिंह, कैलाश चावला, मेहरबान सिंह रावत, माया सिंह, पन्नालाल शाक्य, गौरीशंकर शेजवार और मथुरालाल डाबर जैसे 13 नेताओं को टिकट नहीं दिया गया था. वहीं, 2023 के चुनाव में गोपी लाल जाटव, श्यामलाल द्विवेदी, रामलल्लू बेस, पारस जैन और शरद जैन जैसे वरिष्ठ नेताओं के टिकट भी काटे गए थे.

गलत मतलब निकाल रहे लोग…
अब संघ प्रमुख के बयान के बाद डर यह है कि पार्टी आने वाले समय में निगम-मंडल और अन्य संगठनों में भी इसी फॉर्मूले को लागू कर सकती है, जिससे कई नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर ग्रहण लग सकता है. इस मुद्दे पर बीजेपी प्रवक्ता अजय धवले का कहना है, “संघ प्रमुख के बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. उन्होंने सिर्फ यह कहा कि 75 साल के बाद व्यक्ति को अपनी क्षमता के हिसाब से काम करना चाहिए, इसका मतलब यह नहीं कि पार्टी से बाहर कर देना चाहिए.”

भापजा में कोई नियम नहीं…
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरौलिया ने तीखा हमला बोला. कहा, “भाजपा में कोई तय नीति या सिद्धांत नहीं है. जब चाहे तब अपने फायदे के लिए नियम बनाते और तोड़ते हैं. यह सिर्फ दिखावे की बातें हैं.”

नए नेताओं को मौका!
संघ प्रमुख के इस बयान ने MP बीजेपी में जहां नए नेताओं के लिए संभावनाओं के दरवाजे खोले हैं, वहीं वरिष्ठ नेताओं में एक बार फिर अपने भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है. अब देखना होगा कि पार्टी इस बयान को कितनी सख्ती से लागू करती है, या यह सिर्फ नैतिक सलाह बनकर रह जाता है.



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