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Chhatarpur News: छतरपुर जिले के नौगांव में स्थित मऊसहानिया गांव जो ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है. यहां महाराजा छत्रसाल की स्मारक से लेकर रानी कमलापति स्मारक, धुबेला महल, मस्तानी महल, हृदय शाह महल और शीतल गढ़ी जैसी धरोहरें आज भी मौजूद हैं.
मध्य प्रदेश राज्य के छतरपुर जिले की नौगांव तहसील में स्थित मऊसहानिया जिसे एतिहासिक धरोहरों का गांव कहा जाता है. ये गांव छतरपुर शहर से लगभग 15 किमी दूर है.

मऊसहानिया गांव में धुबेला महल भी बना है. धुबेला महल का निर्माण महाराजा छत्रसाल ने 18वीं शती ई. में कराया था. महल का प्रवेश द्वार भव्य व मेहराबदार है. महल की शैली उत्तर मध्यकालीन क्षेत्रीय बुंदेली शैली है.

मऊसहानिया गांव में मस्तानी महल भी देखने को मिल जाता है. इस महल का निर्माण महाराजा छत्रसाल ने 1696 में कराया था. बता दें, मस्तानी महाराजा छत्रसाल की बेटी थीं. बाजीराव पेशवा ने जब बंगश पर विजय प्राप्त की तो महाराजा छत्रसाल ने अपनी बेटी मस्तानी का बाजीराव पेशवा से विवाह कर दिया.

महेबा गेट महाराजा छत्रसाल की सैनिक छावनी थी जिसे महाराजा छत्रसाल ने 1678 शती ई. में बनवाया था. इस भव्य द्वार का निर्माण महाराजा छत्रसाल ने महेवा जाने के रास्ते पर करवाया था. महेबा द्वारा बुंदेला वास्तुकला का सुंदर उदाहरण है.

शीतल गढ़ी का निर्माण महाराजा छत्रसाल के नाती द्वारा 17वीं शताब्दी में करवाया था. यह प्रसिद्ध स्मारक समृद्ध बुंदेली कला का उदाहरण है, जो आज के एयर कंडीशनर को भी फेल करती है. इस किले का निर्माण आवासीय उद्देश्य और सुरक्षा की दृष्टि से करवाया गया था.

मऊसहानिया में ही महाराजा छत्रसाल के बड़े पुत्र हृदय शाह का महल भी बना हुआ है. हालांकि, यह महल आज खंडहर हो चुका है लेकिन इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आज भी आते हैं.

रानी कमलापति जो महाराजा छत्रसाल की प्रथम रानी थी. बड़ी रानी के निधन पर महाराजा छत्रसाल ने उनकी याद में इस महल का निर्माण करवाया था. यह महल 2 मंजला है. इसका प्रवेश द्वार मेहरायुक्त है और 7 गुंबद हैं.

मऊसहानिया में ही महाराजा छत्रसाल का स्मारक भी बना हुआ है. इसी स्मारक में उनके घोड़े की समाधि भी बनी है. बाजीराव पेशवा प्रथम के द्वारा बनवाया गया महाराजा छत्रसाल स्मारक आज भी महाराज की शौर्य गाथा को बयां कर रहा है. यहां बने स्मारक और महलों को दूर-दूर से लोग देखने आते हैं.