जादुई पेड़! संत पूजते थे, आयुर्वेद में रामबाण औषधि, अंग्रेजों ने पूरे देश से कटवाया था, खासियत जानकर ढूंढेंगे

जादुई पेड़! संत पूजते थे, आयुर्वेद में रामबाण औषधि, अंग्रेजों ने पूरे देश से कटवाया था, खासियत जानकर ढूंढेंगे


Satna News: प्राकृतिक चिकित्सा की परंपरा भारत में हजारों साल पुरानी है. इसी परंपरा में एक ऐसा पौधा भी शामिल है, जिसे शायद आज की पीढ़ी ने न तो देखा है और न ही उसके बारे में सुना है. हम बात कर रहे हैं दहिमन की, जो औषधीय गुणों से भरपूर पेड़ है. इसके बावजूद आज ये पेड़ कम दिखाई पड़ता है. यह पेड़ कभी आयुर्वेदाचार्यों और ऋषि-मुनियों के लिए अत्यंत उपयोगी माना जाता था. इस पेड़ के अंग्रेज दुश्मन थे. उन्होंने इसे कटवाने के आदेश दिए थे. इसके अलावा ये पड़े अन्य कई मामलों में चमत्कारी है. इसको लेकर कई रहस्यमयी कहानियां प्रचलित हैं.

गुलामी के दौर में था क्रांतिकारियों का साथी
लोकल 18 से बातचीत में रोपणीया प्रभारी विष्णु तिवारी ने दावा किया, इतिहास में दहिमन का उल्लेख सिर्फ औषधीय दृष्टि से नहीं, बल्कि एक गुप्त संदेशवाहक के रूप में भी होता है. जब भारत गुलाम था, तब क्रांतिकारी इसकी पत्तियों का इस्तेमाल गुप्त सन्देश भेजने के लिए किया करते थे. इसकी पत्तियों पर लिखा गया कोई भी शब्द सामने से पढ़ा नहीं जा सकता था, जिससे अंग्रेज़ों को भ्रम में रखा जा सकता था. लेकिन, जब इस रहस्य का भंडाफोड़ हुआ तो ब्रिटिश हुकूमत ने बड़े पैमाने पर दहिमन के पेड़ों की कटाई करवा दी, जिससे इसकी संख्या धीरे-धीरे कम होती चली गई. उसी समय इन्होंने इसकी ख़ासियत के बारे में भी जाना और इसे काट कर अपने देश ले गए और दवाइयों में इसका उपयोग किया.

वन्य जीव भी समझते थे इसकी महत्ता
दहिमन की उपयोगिता सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं थी. लोककथाओं के अनुसार, पुराने समय में जब वन्य जीव घायल या थके हुए होते थे तो वे इसी पौधे के पास आकर बैठते या इसके तने से शरीर रगड़ते थे. यह अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि इसमें प्राकृतिक उपचार के गुण मौजूद हैं.

बीमारियों से सुरक्षा का अद्भुत कवच
दहिमन का हर भाग जड़, तना, पत्ती, फल सब औषधीय है. इसकी छाल को एक कप पानी में उबालकर पीने से ब्लड प्रेशर, शुगर और लिवर से जुड़ी बीमारियां दूर रहती हैं. इसके अलावा इसकी लकड़ी का लॉकेट या ब्रेसलेट पहनने से या फिर लाठी ले के चलने पर मानसिक तनाव में कमी आती है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है.

वास्तु और तंत्र विद्या में भी महत्त्वपूर्ण 
आगे बताया, दहिमन सिर्फ आयुर्वेद में नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र और तंत्र शास्त्र में भी महत्वपूर्ण माना गया है. यदि इसकी लकड़ी को घर की उत्तर दिशा में लगाया जाए तो इससे वास्तु दोष दूर होता है और स्वप्न दोष जैसी मानसिक समस्याएं भी नहीं होतीं. तांत्रिकों द्वारा इसे भूत-प्रेत बाधा दूर करने में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है.

सरकारी नर्सरी से ले सकते हैं 14 रुपये में
अच्छी बात ये कि यह पौधा अब भी आसानी से उपलब्ध है. सरकारी नर्सरी में मात्र 14 रुपये में मिल जाता है. अप्रैल से मई के बीच इसके बीज बोने का उपयुक्त समय होता है. किसान चाहें तो गोबर खाद में इसकी बुवाई कर सकते हैं और एक साल में यह पौधा डेढ़ फीट तक बढ़ जाता है. बाद में इसे जमीन में रोपित कर सुरक्षित रूप से संरक्षित किया जा सकता है. साथ ही व्यापार में भी भारी लाभ उठाया जा सकता है.



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