खंडवा: पवित्र तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में अब हर शाम मां नर्मदा की भव्य महाआरती का आयोजन किया जा रहा है. गंगा आरती की तर्ज पर शुरू की गई यह परंपरा कोटितीर्थ घाट पर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान कर रही है. शाम 7 बजे वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ मां नर्मदा का पूजन, अभिषेक और दीप आरती की जाती है.
इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है. स्थानीय प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट और नगर परिषद की संयुक्त पहल से शुरू हुई इस आरती को अब नियमित रूप से प्रतिदिन आयोजित किया जाएगा.
आरती स्थल पर गूंजे जयकारे, दीपों से सजी घाट की सीढ़ियां
आरती के दौरान घाट को विशेष रूप से सजाया गया है. दीपमालिकाओं, मंच सज्जा और भक्तों के लिए बैठने की व्यवस्था की गई है. आरती में भाग ले रहे श्रद्धालु मां नर्मदा के जयकारों के साथ दीपक जलाते हैं और “नर्मदे हर” का सामूहिक उच्चारण करते हैं. इस दौरान मां नर्मदा को पुष्प अर्पित किए जाते हैं, भस्म और चंदन से श्रृंगार होता है तथा पवित्र जल से अभिषेक किया जाता है.
वर्षों पुरानी मांग अब हुई पूरी
श्रद्धालुओं की यह मांग वर्षों से उठ रही थी कि जैसे हरिद्वार और वाराणसी में गंगा आरती होती है, उसी प्रकार ओंकारेश्वर में भी मां नर्मदा की नियमित आरती होनी चाहिए. खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता की पहल पर इस मांग को मूर्त रूप दिया गया है. सावन मास के शुभ अवसर पर इसकी शुरुआत को शुभ संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
ओंकारेश्वर में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आते हैं. अब उन्हें एक और आध्यात्मिक अनुभव मां नर्मदा की महाआरती के रूप में मिलेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयोजन से ओंकारेश्वर के धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा और स्थानीय व्यापारियों को भी आर्थिक लाभ पहुंचेगा.
शिव-पुत्री नर्मदा की आरती का सावन से विशेष संबंध
श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है. नर्मदा को शिव की पुत्री माना जाता है, इसलिए इस आरती का शुभारंभ इसी माह से करना आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है. आगामी दिनों में यह आयोजन ओंकारेश्वर की पहचान का हिस्सा बन सकता है.