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Ujjain News: मंदिर की पुजारी विद्या त्रिवेदी ने एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भोलेनाथ एक बार माता पार्वती के साथ हुए कलह की कथा सुनाते हुए कहते हैं, ‘जब मैंने तुमसे हिमालय की पुत्री के रूप में विवाह किया था, तब म…और पढ़ें
उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव एक बार देवी पार्वती के साथ हुए कलह की कथा सुनाते हुए कहते हैं, ‘जब मैंने तुमसे हिमालय की पुत्री के रूप में विवाह किया था, तब मैंने तुम्हें काली संबोधित किया था.’ पार्वती ने तब शिव से अनेक प्रश्न पूछे कि अन्य प्रसंगों में आपने मुझे काली क्यों नहीं कहा. तब पार्वती कहती हैं, ‘मैं आपकी तरह कुटिल, क्रोधी, विषम, वृथा आचरण वाली नहीं हूं. आप मुझे कृष्णा कहते हैं लेकिन आप तो स्वयं महाकाल नाम से प्रसिद्ध हैं.’ शिव ने भी पार्वती को मूढ़ पंडितमानिनी कह दिया और कहा कि उनमें पार्वत्य गुण है. इन दोनों के कलह से त्रिभुवन कांपने लगा. उसी समय वहां एक लिंग उत्थित हो गया. देवताओं ने उसका नाम कलकलेशवर रखा.
दर्शन मात्र से खत्म होता है ग्रह क्लेश
मंदिर की पुजारी और श्रद्धालु बताते हैं कि यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां हर मनोकामना पूर्ण होती है. जिन लोगों का विवाह का योग नहीं बनता, वे यहां आकर दर्शन करें, तो जल्द ही विवाह का योग बन जाता है. साथ ही वैवाहिक जीवन में अगर क्लेश हो रहा है, तो इस मंदिर में आकर दर्शन मात्र से ग्रह क्लेश खत्म होता है और दांपत्य रिश्तों में मधुरता आती है.
मनोकामना पूरी होने पर करते हैं मंदिर की सेवा
कलकलेशवर महादेव मंदिर में सावन मास में भक्तों का तांता लगा रहता है. जिस भी श्रद्धालु की यहां मांगी गई मनोकामना पूरी होती है, वो मंदिर की सेवा में समर्पित हो जाता है. कामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु अलग-अलग चीजों का दान भी करते हैं.
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