नागपंचमी पर खत्म होती सपेरों की परंपरा और रोजगार: सपेरे बोले- पहले दान-कपड़े मिलते,अब पुश्तैनी पेशा खत्म हुआ; जानिए सपेरों के गांव के हाल – Indore News

नागपंचमी पर खत्म होती सपेरों की परंपरा और रोजगार:  सपेरे बोले- पहले दान-कपड़े मिलते,अब पुश्तैनी पेशा खत्म हुआ; जानिए सपेरों के गांव के हाल – Indore News



नागपंचमी पर कभी कॉलोनियों और मोहल्लों में सुबह-सुबह सपेरों की आवाजें गूंजा करती थीं “नाग को दूध पिलाओ… नाग को दूध पिलाओ” लेकिन अब ये आवाजें लगभग गायब हो गई हैं। पहले सपेरे सांप पकड़कर घर-घर जाकर पूजा करवाते थे, लेकिन अब ऐसा करना कानूनन अपराध है।

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वन विभाग और पुलिस की सख्ती के चलते यह परंपरा लगभग खत्म हो गई है। इंदौर के पास खंडवा रोड के एक गांव में रहने वाले सपेरे अब भी इस पुश्तैनी काम से जुड़े हैं और उनका दर्द है कि उनका रोजगार और परंपरा दोनों खत्म हो रहे हैं।

‘दैनिक भास्कर’ ने इंदौर से 18 किलोमीटर दूर खंडवा रोड पर स्थित उमरीखेड़ा गांव में जाकर उनकी स्थिति जानी। यह गांव कालबेलिया समाज (सपेरों) का एक बड़ा केंद्र है।

खंडवा रोड स्थित सपेरों के कस्बे की हकीकत

उमरीखेड़ा गांव में लगभग 500 लोगों की आबादी है। कभी यह पूरा समाज साल भर सांपों पर आधारित अपने पेशे से जीवन यापन करता था। त्योहार, मंदिर, मेले—हर अवसर पर ये लोग टोकरियों में सांप लेकर जाते थे और लोग उन्हें नागदेवता के नाम पर दान देते थे। इससे उनकी रोज़ी-रोटी चलती थी।

एक दिन में साल भर का कपड़ा-दान

समाज की संगीता नाथ बताती हैं, “नागपंचमी हमारे पेशे का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। परंपरा के अनुसार हम सांप लेकर घर-घर जाते हैं और नागदेवता की पूजा करवाते हैं। उस दिन मिले कपड़े और दान ही हमारे लिए बड़ी पूंजी होती है। यही कपड़े हम सालभर पहनते हैं। लेकिन अब स्थिति यह है कि पुश्तैनी पेशा लगभग खत्म हो चुका है।”

उनकी मांग है कि प्रशासन कम से कम साल में एक दिन नागपंचमी के दिन उन्हें सांप के साथ जाकर नागदेवता के दर्शन करवाने की अनुमति दे।

“सांप ने काटा तो रस्सी बांधकर जहर निकाल दिया”

70 वर्षीय सपेरे राजू नाथ बताते हैं कि वे 12-13 साल की उम्र से ही सांप पकड़ते आ रहे हैं। अब तक अनगिनत सांप पकड़ चुके हैं। तीन बार उन्हें सांप ने काटा भी। “हमने कोहनी के ऊपर रस्सी बांधकर ज़ख्म पर चीरा लगाया और जहर निकाल दिया। तीन दिन पहले भी सांप ने काटा था,” कहते हुए वे हाथ का घाव दिखाते हैं।

अब घरों, बंगलों और फार्महाउस से सांप पकड़ते हैं

अब वे घरों, बंगलों और फार्महाउस से सांप पकड़ते हैं। आधी रात को भी सूचना मिलती है तो वहां पहुंचकर सांप को पकड़ते हैं और जंगल में छोड़ देते हैं। नागपंचमी अब पहले जैसी नहीं रही। अगर सांप लेकर बाहर निकलें, तो प्रशासन पकड़ लेता है।

सांपों को लेकर बताए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • बलवंत नाथ और अन्य सपेरों ने बताया कि सांप दूध नहीं पीता। वह मांसाहारी जीव है और चूहे, मेंढक, छिपकली, कीड़े-मकोड़े आदि खाता है। सपेरे पकड़े गए सांपों को गोश्त खिलाते हैं।
  • यह कहना कि सांप को 100 दिन भूखा रखा जाता है ताकि वह दूध पिए, पूरी तरह झूठ है। वे नागपंचमी से 8-10 दिन पहले ही सांप पकड़ते हैं।
  • फिल्मों में दिखाया गया कि बीन बजाने से सांप बाहर आ जाता है—ये केवल भ्रम है। वास्तव में सांप बीन की धुन नहीं सुनता, बल्कि कंपन से प्रतिक्रिया देता है।
  • इंदौर के आसपास भोलेनाथ के गले में लिपटे जाने वाले सांप की प्रजाति अधिक मिलती है। इसके अलावा ‘घोड़ा पछाड़’, ‘दीवड़’ जैसी जहरीली प्रजातियां भी होती हैं।
  • कस्बे के कई सपेरे अब सांप-बिच्छू के काटने का घरेलू इलाज भी करते हैं और कई लोगों की जान बचा चुके हैं।

आधी रात को भी निकल जाते हैं सांप पकड़ने

सपेरे किशन नाथ का परिवार वर्षों से यह काम करता आ रहा है। उनके कुछ परिजन अब प्राणी संग्रहालय में काम कर रहे हैं। अब लोग जब घर या फार्म हाउस में सांप दिखने की सूचना देते हैं, तो वे तुरंत पहुंच जाते हैं। “हमारे नंबर कई लोगों के पास हैं, इसलिए हमें तुरंत बुला लिया जाता है,” किशन बताते हैं।

सांप पकड़ने की तकनीक

  • वे सांप पकड़ने के लिए एक हल्की डंडी का उपयोग करते हैं। चिमटा या मोटा डंडा नहीं प्रयोग करते ताकि सांप को चोट न पहुंचे।
  • पहले संभावित जगह (घास, झाड़ियां, कोने) में डंडी से हलचल कर सांप की मौजूदगी का पता लगाया जाता है।
  • यदि सांप दिख जाए तो उसके मूवमेंट और मुंह की दिशा पर नजर रखते हैं। जैसे ही अवसर मिलता है, डंडी से उसके मुंह के पीछे दबाते हैं ताकि वह पलटकर डस न सके।
  • फिर दूसरे हाथ से उसे सुरक्षित पकड़कर थैली में डाल देते हैं। थैली मोटे कपड़े की होती है ताकि सांप बाहर न निकल सके।
  • बाद में एक सुरक्षित स्थान पर जाकर उसके दांत निकाल दिए जाते हैं।

इस मौके पर एक सपेरे ने खंडवा रोड के सीमावर्ती क्षेत्र में आधे घंटे तक सांप के संभावित ठिकानों की तलाश की और एक सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़कर दिखाया।



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