नागचून गांव की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां सांपों की संख्या आम इलाकों से कहीं ज्यादा है. यहां सांप खेतों, गलियों, तालाबों में तो मिलते ही हैं, लेकिन बेडरूम, किचन, कपड़ों की अलमारी और यहां तक कि जूतों में भी अक्सर दिख जाते हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि ऐसा कोई घर नहीं बचा जहां सांप न घुसे हों. गांव के सरपंच सौरभ चौरे बताते हैं कि यहां की जमीन में दलदली इलाका है, कई पुराने तालाब हैं और बांस के झुरमुट हैं. ये सभी चीजें सांपों के लिए आदर्श माहौल तैयार करती हैं. साथ ही गांव के खेतों में मेंढक, चूहे और कीड़े-मकोड़े बड़ी मात्रा में मिलते हैं, जो सांपों के भोजन का मुख्य स्रोत हैं.
इस गांव के लोगों ने सांपों के साथ रहना सीख लिया है. महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग सभी अब सांपों से डरते नहीं. अगर किसी के घर में सांप आ जाए तो उसे मारते नहीं, बल्कि अगरबत्ती जलाकर या थोड़ा-बहुत धुआं करके इंतजार करते हैं कि सांप खुद-ब-खुद चला जाए.
क्या बोले गांव वाल?
गांव के निवासी बताते हैं कि उनके बच्चे भी अब सांप की प्रजातियां पहचानने लगे हैं. “ये कोबरा है, ये रसेल वाइपर है, ये ज़हरीला नहीं है…” जैसी बातें अब आम हैं. जब भी कोई जूता पहनना होता है या अलमारी खोलनी होती है, तो पहले झटक कर देखा जाता है कहीं कोई नागिन आराम से बैठी न हो! गांव में सांप पकड़ने वाले युवाओं की कमी नहीं. सरपंच चौरे खुद भी कई बार घरों से सांपों को पकड़कर बाहर छोड़ चुके हैं.
खास बात यह है कि इतने सांपों की मौजूदगी के बावजूद यहां लोगों को सांपों ने नुकसान नहीं पहुंचाया, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से रसेल वाइपर नामक खतरनाक प्रजाति की संख्या बढ़ी है. यह सांप छिपकर वार करता है और इसके काटने से हाल ही में गांव में दो लोगों की मौत हो चुकी है. एक बुज़ुर्ग हमीद चाचा और एक युवक जिसे गांव वाले चिया के नाम से जानते थे.
गाड़ियों में भी सांप
नागचून की सड़कों पर चलती गाड़ियों में भी कई बार सांप घुस जाते हैं. एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि उसे तब पता चला जब एक सांप कार की सीट के नीचे से निकलकर बाहर भागा. वह हंसते हुए कहते हैं- हम तो आदि हो गए हैं. नागचून सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी उदाहरण है इंसान और जीव-जंतुओं के शांतिपूर्ण सह-जीवन का. जहां दूसरे लोग सांप देख कर डर जाते हैं, वहीं नागचून के लोग उन्हें परिवार का सदस्य मानते हैं। पर अब बढ़ती रसेल वाइपर की संख्या गांव के लिए एक नया खतरा बनती जा रही है.