बिना दवा, बिना डॉक्टर! बघेलखंड में ‘दहीमन’ की लकड़ी से बीपी, स्ट्रेस और शुगर पर हो रहा काबू

बिना दवा, बिना डॉक्टर! बघेलखंड में ‘दहीमन’ की लकड़ी से बीपी, स्ट्रेस और शुगर पर हो रहा काबू


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Bp Sugar Ayurvedic Treatment: बघेलखंड में लोग दहीमन नामक पेड़ की लकड़ी से बीपी, तनाव और शुगर पर काबू पा रहे हैं. जानिए इस देसी लॉकेट के पीछे छिपा आयुर्वेदिक राज और वैज्ञानिक नजरिया.

शिवांक द्विवेदी, सतना: आज के समय में जहां ट्रेंडी और फैंसी लॉकेट व रिस्टबैंड पहनने का चलन बढ़ गया है वहीं बघेलखंड के लोग वर्षों से एक खास देसी परंपरा को निभाते आ रहे हैं. यहां लोग दहीमन नामक पेड़ की सूखी लकड़ी को लॉकेट या ब्रेसलेट के रूप में धारण करते हैं. देखने में ये सामान्य लकड़ी का टुकड़ा लगता है लेकिन इसके पीछे छिपा है एक गहरा आयुर्वेदिक रहस्य. बघेलखंड के ग्रामीणों और बुज़ुर्गों के बीच ये परंपरा असरदार देसी उपचार के रूप में भी अपनाया जाता है. मगर ऐसा क्यों? और इससे स्थानियों को कैसा लाभ होता है. इसके पीछे उपचार ही है या कोई धार्मिक मान्यता ?

ब्लड प्रेशर से राहत देने वाली लकड़ी
औषधीय पेड़-पौधों की जानकारी रखने वाले विष्णु तिवारी लोकल 18 से बताते है की बताते हैं कि दहीमन की लकड़ी को यदि गले में लॉकेट के रूप में या हाथ में ब्रेसलेट की तरह पहना जाए तो यह ब्लड प्रेशर के रोगियों को राहत देती है. उनका दावा है कि बिना किसी दवा या डॉक्टर की सलाह के केवल इस लकड़ी को शरीर से स्पर्श में रखने भर से 15 दिनों के भीतर बीपी नियंत्रण में आ सकता है. यह बात आयुर्वेदाचार्य ग्रंथों में भी बताई गई है और स्थानीय लोग इस परंपरा को सदियों से अपनाते आ रहे हैं.

मानसिक तनाव और अन्य रोगों में भी असरदार
दहीमन केवल बीपी ही नहीं बल्कि मानसिक तनाव से भी निजात दिलाने में सहायक मानी जाती है. विशेषज्ञ के अनुसार यदि शरीर में कमजोरी, थकावट या मानसिक बेचैनी महसूस हो रही हो तो दहीमन की लकड़ी को धारण करने से राहत मिलती है. यह लकड़ी ऊर्जा संतुलन बनाए रखने में मदद करती है जिससे व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करता है.

दहीमन की छाल से बनती है आयुर्वेदिक चाय
स्थानीय लोग दहीमन की छाल को उबालकर पीते हैं जिससे यह एक तरह की आयुर्वेदिक चाय बन जाती है. यह चाय शुगर लेवल को कंट्रोल करने लिवर को साफ रखने और शरीर में संक्रमण से लड़ने के लिए एक एंटीबायोटिक की तरह कार्य करती है.
बघेलखंड की यह अनोखी परंपरा आधुनिक विज्ञान को चुनौती भले न देती हो लेकिन आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से यह परंपरा एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति का प्रभावी उदाहरण है. जब फैशन और स्वास्थ्य एक साथ जुड़ते हैं तब दहीमन जैसा देसी लॉकेट सिर्फ दिखावा नहीं बल्कि जीवनशैली बन जाता है.

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बिना दवा, बिना डॉक्टर…’दहीमन’ की लकड़ी से बीपी, स्ट्रेस-शुगर हो रहा कंट्रोल!

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



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