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Satna News: गांव में सड़क जैसी कोई चीज नहीं है. उसकी जगह सिर्फ दलदली रास्ता है. शव को जब अस्पताल ले जाना था, तो वाहन डेढ़ किलोमीटर पहले ही कीचड़ में फंस गया. मजबूरी में परिजनों और ग्रामीणों ने शव को चारपाई पर र…और पढ़ें
गांव में सड़क नाम की कोई चीज नहीं है. उसकी जगह सिर्फ दलदली रास्ता है. जब शव को अस्पताल ले जाना हुआ, तो वाहन डेढ़ किलोमीटर पहले ही कीचड़ में फंस गया. मजबूरी में परिजन और ग्रामीण शव को चारपाई पर रख कीचड़, दलदल और फिसलन भरे रास्तों से होते हुए नंगे पांव ले गए. उस वक्त सारे गांव की आंखें नम थीं. पांव थके हुए थे और मन में था सिस्टम को लेकर गुस्सा.
ग्रामीणों ने लोकल 18 से बात करते हुए कहा कि हर साल जनप्रतिनिधि आते हैं, वादे करते हैं, भाषण देते हैं लेकिन हालात जस के तस हैं. एक साल पहले भी बारिश के दौरान एक गर्भवती महिला समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण दम तोड़ चुकी है. इसके बावजूद न सड़क बनी और न ही कोई सुविधा है. जनपद सदस्य प्रतिनिधि धीरेन्द्र सिंह चंदेल ने लोकल 18 से कहा कि यहां की हालत यह है कि घुटनों तक पानी भर जाता है. न रास्ता है, न बिजली है और न पानी है. लोग मरते रहें लेकिन सिस्टम को फर्क नहीं पड़ता. आज भी लोग यहां 1947 वाली जिंदगी जी रहे हैं. इस बयान से साफ है कि हालात की जानकारी नेताओं को है लेकिन समाधान कोई नहीं कर रहा.
व्यवस्था पर उठते सवाल
यह घटना न सिर्फ मानवता को झकझोरती है बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता पर भी गहरा सवाल खड़ा करती है. जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक हर आपदा में यहां के लोग ऐसे ही भुगतते रहेंगे. सवाल यह है कि क्या अब भी कोई जागेगा या चारपाई पर उठते शवों की तस्वीरें यूं ही वायरल होती रहेंगी.