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Bhopal News : भोपाल में रहने वाले दिहड़ी मजदूर राजेश विश्वकर्मा अपने पड़ोस में रहने वाली बीमार महिला को अस्पताल लेकर गया. काम को उसने इंसानियत के नाते ही किया था. लेकिन इस नेक काम की सजा उसे पुलिस ने दी. राजेश को…और पढ़ें
घटना के बारे में बताते समय राजेश की आंखों में आंसू आ गए. वो बताते हैं, ‘मेरे पास पैसे भी नहीं थे, इसलिए मैं वकील भी नहीं कर पाया. मैं तो बेकसूर था लेकिन पुलिस ने हत्यारोपी बताकर जेल में रख दिया. घर खाली करने का भी पुलिस ने मुझे मौका नहीं दिया. बस ताला लगवा दिया.’ बहन कमलेश विश्वकर्मा ने बताया कि मुझे नौ दिनों बाद भाई की गिरफ्तारी का पता चला. पुलिस वालों ने मुझे फोन करके कोर्ट बुलाया था. घर में अकेले थी तो नहीं जा पाई. एक हफ्ते बाद जब भाई से मिलने गई पहुंची तो उसने पूरी कहानी बताई.
कोर्ट ने राजेश को निर्दोष करार दिया
दरअसल, आशा देवी की पोस्टमार्टम में रिपोर्ट में मौत का कारण गला दबाना बताया गया लेकिन उसके शरीर या आसपास किसी के भी फिंगर प्रिंट नहीं मिले. घटना के समय मृतका और आरोपी एक साथ थे, इसका कोई पुख्ता साक्ष्य भी नहीं मिला. कोर्ट ने निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया. 13 महीने बाद कानूनी सहायता मिली तो राजेश की जेल से रिहाई हो पाई है लेकिंज अभी भी उसे इंसाफ नहीं मिला है. अब वह बेरोजगार हो गया है.
राजेश के साथ हुए नाइंसाफ की कहानी बेहद दर्दनाक
जेल जाने की वजह से कोई उसे काम नहीं दे रहा. राजेश के साथ हुए नाइंसाफ की कहानी बेहद दर्दनाक है. जेल में रहने की वजह से वह 13 महीने से घर का किराया नहीं चुका पाया है. मध्य प्रदेश में राजेश का केस एक बानगी भर है. प्रदेश की जेलों में करीब 6,185 कैदी अंडरट्रायल हैं. एक साल से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं. राजेश की आंखें एक ही सवाल का जवाब चाहती हैं कि उसके नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
An accomplished digital content creator and Planner. Creating enhanced news content for online and social media. Having more than 10 years experience in the field of Journalism. Done Master of Journalism from M…और पढ़ें
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