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ये कहते हुए इंदौर के रहने वाले देवव्रत कलसांगरा भावुक हो जाते हैं। दरअसल, देवव्रत के पिता रामजी कलसांगरा पिछले 17 सालों से लापता है। एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) ने रामजी को मालेगांव ब्लास्ट में आरोपी बनाया है। उनके साथ इंदौर के ही रहने वाले संदीप डांगे भी आरोपी है और वह भी 17 साल से लापता है।
दोनों पर आरोप है कि उन्होंने ही 29 सितंबर 2008 को मालेगांव के भीकू चौक पर शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट की दुकान के बाहर बाइक में बम प्लांट किया था। 31 जुलाई को मालेगांव ब्लास्ट केस का फैसला सुनाते हुए एनआईए कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा समेत इस केस के 7 आरोपियों को बरी कर दिया।
कोर्ट का फैसला आने के बाद दैनिक भास्कर रामजी कलसांगरा के घर पहुंचा। यहां कलसांगरा के बेटे देवव्रत से बात की। देवव्रत ने कहा, ‘हमने कई बार एटीएस और एनआईए को पिताजी के बारे में स्थिति साफ करने के लिए कहा, मगर कुछ नहीं हुआ।’ देवव्रत ने कहा कि मां आज भी मांग में सिंदूर भरती है, उन्हें यकीन है कि पिताजी जिंदा है। पढ़िए रिपोर्ट
बेटा बोला- 17 साल पहले पिता के साथ आखिरी दशहरा मनाया था देवव्रत कलसांगरा की उम्र करीब 31 साल है। वे कहते हैं,’ साल 2008 में मैं आठवीं में पढ़ता था। जिस समय ये पूरा घटनाक्रम हुआ हम लोग दशहरा और दिवाली मनाने इंदौर से शाजापुर गए थे। 9 अक्टूबर को दशहरा था। ये आरएसएस का स्थापना दिवस भी होता है। मेरे पिताजी बाल्यकाल से ही संघ से जुड़े थे, इसलिए उनके लिए ये अहम दिन था।’
‘दशहरा मनाने के बाद वो वापस इंदौर लौट गए थे। हम तीनों भाई मां के साथ शाजापुर ही रुक गए थे। 28 या 29 अक्टूबर को मालेगांव ब्लास्ट मामले में एटीएस ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को गिरफ्तार किया। इसी के बाद मेरे पिता का नाम भी ब्लास्ट से जुड़ा। मैं छोटा था। मुझे बहुत सी बातें पता नहीं थीं। अखबार और टीवी पर बार-बार उस घटनाक्रम को दिखाया जा रहा था।

मेरे चाचा भी 6 साल तक बिना आरोप के जेल में रहे देवव्रत ने बताया कि इस केस में मेरे चाचा शिवनारायण कलसांगरा को भी एटीएस ने गिरफ्तार किया था। 2008 में उन्हें हिरासत में लेने के 15 दिन बाद उनकी गिरफ्तारी दिखाई गई। उन्हें टॉर्चर किया गया। एटीएस ने चाचा के इंदौर स्थित घर से दो टाइमर जब्त होना बताया था।
चाचा 2014 तक जेल में रहे, बाद में उन्हें जमानत मिली। साल 2017 में एनआईए ने उन्हें सारे आरोपों से बरी कर दिया। बेगुनाह होते हुए भी उन्होंने 6 साल तक जेल की सजा काटी।
मां ने संघर्ष कर पढ़ाया-लिखाया, अच्छा नागरिक बनाया देवव्रत बताते हैं कि पिता के लापता होने के बाद हम तीनों भाइयों की जिम्मेदारी मां पर आ गई थी। उस वक्त कोई न कोई जांच एजेंसी के अफसर घर आकर मां को परेशान करते थे। मां ने समाज के ताने भी सुने और मानसिक रूप से परेशान रहीं, लेकिन इस सब का हमारी परवरिश पर कोई असर नहीं पड़ा।
उन्होंने हम तीनों भाइयों को अच्छे संस्कार दिए और एक अच्छा नागरिक बनाया। हमने मानसिक रूप से मजबूत बनाया। मेरे पिता को हिंदू आतंकवादी कहा गया। समाज में ही हमारे परिवार को हीन नजरों से देखा गया, लेकिन मां ने न तो शहर बदला और न ही हमारा स्कूल।

जांच एजेंसी से स्पष्टीकरण मांगा, कोई जवाब नहीं मिला देवव्रत कहते हैं कि साल 2017 में महाराष्ट्र एटीएस के रिटायर्ड इंस्पेक्टर मेहबूब मुजावर ने कोर्ट में एफिडेविट देकर कहा था कि रामजी कलसांगरा और उनके साथी संदीप डांगे की एटीएस की कस्टडी में हत्या कर दी गई। इस खबर को सुनने के बाद हमने जांच एजेंसी और कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा था।
हमने उनसे गुजारिश की थी कि यदि मेरे पिता की बॉडी उनके पास है तो वह हमें मुहैया करवा दें, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। हमने कोर्ट से ये गुजारिश भी की थी कि एटीएस अधिकारियों की जांच होना चाहिए। हमें तो ये तक नहीं पता था कि एटीएस ने पिताजी को पकड़ा भी था या नहीं।
ये पूछने पर कि क्या वो मानते हैं कि उनके पिता जीवित है, देवव्रत ने कहा- अभी हमें कुछ भी नहीं पता। इस सवाल का जवाब तो हमारा परिवार भी तलाश रहा है। इस केस में तो पिताजी केवल आरोपी है, लेकिन उनका ट्रायल ही नहीं हुआ। उनके मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई है तो हमें कुछ पता ही नहीं था कि इस मामले में क्या चल रहा है।

फ्लैट सीज, कलसांगरा की फोटो तक नहीं देवव्रत कहते हैं कि एनआईए ने उनकी संपत्ति भी कुर्क की है। इंदौर के विजयनगर के राजीव निवास में हमारा एक फ्लैट अभी भी कुर्क है। साल 2011 में एनआईए ने इस मामले की जांच शुरू की थी तब अधिकारी हमारे घर आए और पिताजी के साथ हमारे बचपन के फोटो, प्रमाण पत्र, मकान की रजिस्ट्री सबकुछ लेकर चले गए। आज हमारे पास पिताजी की एक भी तस्वीर नहीं है।
पत्नी बोली- मैं पति को जीवित ही मानती हूं भास्कर ने रामजी कलसांगरा की पत्नी लक्ष्मी कलसांगरा से बात की तो उन्होंने कहा कि मालेगांव ब्लास्ट केस के बाद से ही वो गायब है। 17 साल हो चुके हैं भगवान पर भरोसा है। लक्ष्मी ने बताया कि पति के लापता होने के बाद खेती-बाड़ी से लेकर मजदूरी तक की तब जाकर तीनों बेटों का पालन-पोषण कर सकी।
हर तीसरे दिन एनआईए और एटीएस के अधिकारियों ने तहकीकात के नाम पर परेशान किया। उन्होंने ऐसे सलूक किया जैसे हम अपराधी हो। वे मेरे बच्चों की सारी बचपन की यादें ले गए। उनकी एक तस्वीर तक नहीं छोड़ी। वह क्या मानती है? रामजी कलसांगरा जीवित है या नहीं? इस सवाल पर बोलीं- ये तो सिर्फ भगवान जानते हैं या फिर जांच करने वाले लोग।
जांच एजेंसियों को बताना चाहिए की मेरे पति जीवित है या मर चुके हैं। मैं पिछले 17 सालों से सुहागिन का जीवन जी रही हूं।

ATS ने बताया- प्रज्ञा ने रामजी को ब्लास्ट के लिए तैयार किया एनआईए कोर्ट ने इस मामले के 7 आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही ये भी कहा कि एटीएस और एनआईए की जांच में विरोधाभास था। एटीएस ने अपनी चार्जशीट में बताया था कि जनवरी 2008 से आरोपियों ने ब्लास्ट की प्लानिंग करना शुरू की थी। इस दौरान अप्रैल से लेकर अगस्त के महीने तक सभी की भोपाल, इंदौर और उज्जैन में मीटिंग हुई थी।
एटीएस ने चार्जशीट में बताया कि 11 जून 2008 को इंदौर स्थित सर्किट हाउस में एक मीटिंग हुई थी। जिसमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ने रामचंद्र कलसांगरा और संदीप डांगे को सुधाकर द्विवेदी से मिलवाया था और कहा था कि ये दोनों सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं। इसके बाद जुलाई 2008 में एक और मीटिंग हुई।
इस मीटिंग में प्रज्ञा ने सुधाकर द्विवेदी को कर्नल पुरोहित से विस्फोटक रामजी कलसांगरा और संदीप डांगे को पुणे में उपलब्ध कराने के लिए कहा था। इसी तरह अगस्त 2008 में हुई सीक्रेट मीटिंग में कर्नल पुरोहित को रामजी कलसांगरा और संदीप डांगे के लिए आरडीएक्स खरीदने की जिम्मेदारी दी गई थी।

चार्जशीट में लगाए ये आरोप कोर्ट में साबित नहीं हो पाए हैं।
सीबीआई और एनआईए की वांटेड लिस्ट में कलसांगरा रामजी कलसांगरा और संदीप डांगे दोनों ही एनआईए और सीबीआई की वांटेड लिस्ट में है। दोनों पर 10 लाख रु. का इनाम घोषित किया है। हैदराबाद में 2007 में हुए मक्का-मस्जिद ब्लास्ट केस में भी सीबीआई को दोनों की तलाश है। इसके अलावा समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में भी जांच एजेंसियों को दोनों की तलाश है।
एडवोकेट जगदीश गुप्ता कहते हैं कि ये आरोपी चार्जशीट में 173(8) सीआरपीसी के तहत वांटेड हैं। इनके बारे में विवेचना जारी है। ये जब भी पकड़े जाएंगे तो इनके खिलाफ चार्जशीट पेश की जाएगी। सिविल केस में यदि कोई व्यक्ति 7 साल तक लापता रहता है तो उसे मृत मानकर उसकी संपत्ति संबंधी कार्रवाई की जा सकती है। उस केस में भी परिवार के सदस्य को ही सिविल सूट दाखिल करना होता है, लेकिन ये मामला आपराधिक है।

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मालेगांव ब्लास्ट मामले में 17 साल बाद फैसला आया। ब्लास्ट में 6 लोगों की मौत हुई थी।
महाराष्ट्र के मालेगांव ब्लास्ट केस में NIA स्पेशल कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा समेत सातों आरोपियों को बरी कर दिया है। इनमें पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर धर द्विवेदी शामिल थे। पढ़ें पूरी खबर…
2. संघ प्रचारक मर्डर में भी आया था साध्वी का नाम

करीब 8 साल पहले साल 2017 में भी देवास कोर्ट ने संघ प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में फैसला सुनाया था। उस मामले में भी साध्वी प्रज्ञा सिंह आरोपी थीं। कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सहित 8 लोगों को बरी किया था। पढ़ें पूरी खबर…