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White Sandalwood Farming: मध्य प्रदेश में सफेद चंदन की खेती शुरू हो गई है. अगर आप मोटी कमाई करना चाहते हैं तो सफेद चंदन की खेती कर सकते हैं. (रिपोर्ट: पिंटू अवस्थी)
जिसे पहले सपना माना जाता था, अब वह संभव हो गया है. छतरपुर में सफेद चंदन की खेती शुरू हो गई है. कर्नाटक के जंगलों में मिलने वाला सफेद चंदन अब छतरपुर में भी उगाया जा सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ टिप्स अपनाकर यहां के किसान भाई सफेद चंदन की खेती आसानी से कर सकते हैं.

आस्था ग्रीन विलेज नर्सरी के मैनेजर राजू गौतम बताते हैं कि छतरपुर में सफेद चंदन की खेती सफल है. लेकिन, लाल चंदन यहां नहीं उग सका. हमने नर्सरी में लाल और पीला चंदन भी लगाया है, लेकिन ये सिर्फ डेमो के लिए है. छतरपुर में सिर्फ सफेद चंदन ही तैयार हो सकता है.

लाल चंदन तैयार भी हो जाए तो उसमें सैंड नहीं आएगा. हमने अब तक 5300 सफेद चंदन के पौधे तैयार कर लिए हैं. राजू गौतम बताते हैं कि शुरुआत में इसका बीज नहीं था, तब कर्नाटक से बीज लाए थे. अब हम खुद ही सफेद चंदन की नर्सरी तैयार करते हैं. हमारे यहां 1 से लेकर 1000 सफेद चंदन के पौधे ले सकते हैं.

राजू बताते हैं कि चंदन के पौधे लगाने का उचित समय जुलाई-अगस्त के बीच का है. हालांकि, सितंबर तक भी लगा सकते हैं. 3 बारिश होने के बाद ही इसे लगाना चाहिए. बारिश के पहले गड्ढे खोदकर उसमें गोबर खाद डालकर ऊपर तक मिट्टी भर दें.

बारिश होने के बाद ये मिट्टी गड्ढे के अंदर चली जाएगी. सफेद चंदन लगाने से पहले ध्यान दें कि वहां जमीन कैसी है. क्योंकि सफेद चंदन काली और लाल मिट्टी में नहीं होता है. ये पथरीली जमीन में ही होता है.

राजू बताते हैं कि सफेद चंदन 12 साल में 40 फीट लंबाई का तैयार हो जाता है. 1 पेड़ से 12 साल में 25 किलो सैंड वाली लकड़ी मिल जाती है. अभी 1 किलो सफेद चंदन का भाव 19 हजार है. हालांकि, इसमें 25 पर्सेंट शासन शुल्क भी लगता है. फिर भी 1 पेड़ से 12 साल बाद लगभग 4 लाख का शुद्ध मुनाफा हो जाता है.

राजू बताते हैं कि चंदन पौधा जब 3 साल का हो जाता है तो पटवारी के यहां खसरा और बीमा पर पेड़ को दर्ज कराना पड़ता है. 3 साल तक तो यह नर्सरी की कैटेगरी में आता है. जब चंदन का पौधा 12 साल का हो जाए तो अपनी तहसील के राजस्व विभाग में तहसीलदार के यहां आवेदन कर दें.