अटल पथ पर निरीक्षण के दौरान जस्टिस सप्रे और अधिकारी।
सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे शुक्रवार को राजधानी की सड़कों पर उतरे। उन्होंने 8 प्रमुख ब्लैक स्पॉट का मुआयना किया। हर लोकेशन पर अधिकारियों से लगातार सवाल करते रहे- यहां कितनी मौतें हुई
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रोड इंजीनियरिंग में जो भी दिक्कत हैं, उन्हें ठीक कर दिया गया है। इस पर सप्रे ने फिर सवाल किया- जब सब कुछ ठीक कर रहे हैं तो फिर हादसों में मौतें क्यों हो रही हैं? सड़क हादसे में एक भी मौत नहीं होनी चाहिए। दोपहिया में आगे और पीछे दोनों को हेलमेट पहनाएं। इस दौरान उन्होंने बागसेवनिया तिराहा री-डिजाइन करने, 1250 चौराहे से रोटरी हटाने और ज्यादातर ब्लैक स्पॉट पर लेफ्ट टर्न क्लियर करने के निर्देश दिए।
लेफ्ट टर्न क्लियर करें, दोपहिया में आगे-पीछे दोनों सवारों को हेलमेट पहनाएं
- भेल : मेरी गाड़ी ही ऊपर-नीचे हो रही , आम दिनों में क्या स्थिति होगी ?
निरीक्षण पर पहुंचे जस्टिस सप्रे बोले- आज मेरी गाड़ी ही ऊपर-नीचे हो रही थी, आम दिनों में क्या हालत होती होगी? अफसरों ने बताया- सड़क भेल की है। सप्रे ने कहा- तत्काल सुधार कराएं। चौराहे पर साइनेज, रोड मार्किंग जैसे जरूरी काम प्राथमिकता से कराएं।
- तरण पुष्कर तिराहा : इंजीनियरिंग में क्या सुधार किया?
उन्हें बताया गया यहां दो हादसों में दो मौतें हुईं। सप्रे ने पूछा- रोड इंजीनियरिंग में क्या सुधार किया? इंजीनियर बोले- संजीवनी की ओर लेफ्ट टर्न के लिए ज़मीन चाहिए। पोल हटाने का काम चल रहा है। सप्रे ने निर्देश दिए- रोड मार्किंग कराएं, रात के लिए साइनेज लगाना अनिवार्य है।
- 1250 चौराहा…इतनी बड़ी रोटरी क्यों बना रखी है री-डिजाइन कराएं
यहां पता चला-तीन साल में दो हादसे, दोनों रात में। कारण- ओवरस्पीड और बिना सीट बेल्ट गाड़ी चलाना। जस्टिस सप्रे ने पूछा- इतनी बड़ी रोटरी क्यों? बोले- मूर्ति हटाएं, चौराहा री-डिजाइन करें। सिग्नल इस तरह लगाएं कि दूर से साफ नजर आएं, ताकि हादसे रोके जा सकें।अलग स्थान पर लगाया जाए। सिग्नल भी ठीक कराएं ताकि दूर से दिखाई दें।
- कोर्ट चौराहा : पर्यावास भवन के पास ब्लैक स्पॉट खत्म
यहां तीन साल में 7 एक्सीडेंट, दो मौतें हुईं। बाद में रोड सेफ्टी के लिए डिवाइडर, जेब्रा क्रॉसिंग, लेफ्ट टर्न और सिग्नल सुधारे गए। पर्यावास तिराहे की क्रॉसिंग बंद की गई। जस्टिस सप्रे को बताया गया कि इन सुधारों के बाद यहां अब हादसे नहीं हो रहे हैं।
मप्र हादसों में नं.2
2020 से हर साल राजधानी में सड़क हादसे बढ़े हैं। इनमें होने वाली मौतों और घायलों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। एनसीआरबी के डाटा के मुताबिक तमिलनाडु के बाद मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं।
छह महीने बाद फिर करूंगा निरीक्षण
दौरे के वक्त निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण, एडीएम अंकुर मेश्राम, एडिशनल डीसीपी ट्रैफिक बीएस कौल, एसडीएम रविशंकर राय, एसीपी अजय वाजपेयी आदि थे। जस्टिस सप्रे ने कहा- छह महीने में सड़कें ठीक करें। फिर निरीक्षण करूंगा।