श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के 20वें अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव 2025 की चौथी संध्या में कलाप्रेमियों का जमावड़ा रहा। त्रिवेणी पुरातत्व संग्रहालय के सभागृह में दीप प्रज्ज्वलन के बाद शास्त्रीय संगीत और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां हुईं।
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कार्यक्रम की शुरुआत खैरागढ़ के विवेक नवरे के शास्त्रीय सरोद वादन से हुई। उन्होंने भगवान शिव से जुड़े प्राचीन राग श्री की प्रस्तुति दी।
यह प्रस्तुति राग श्री आलाप से शुरू होकर जोड़ और झाला की जटिलताओं तक पहुंची। तबले पर भोपाल के रामेंद्र सोलंकी ने संगत की।
दूसरी प्रस्तुति में भारत की शास्त्रीय नृत्य शैली सत्रिया का मंचन हुआ। नृत्यांगना उषा रानी बैश्य और विद्वान डॉ. जादव बोराह ने इसे प्रस्तुत किया। गायक भूपेन नाथ और खोल वादक कृष्ण कांत दास ने संगत दी।
बोरगीत की इस प्रस्तुति में मंजीरा, बांसुरी और खोल जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का उपयोग किया गया।
महोत्सव की अंतिम प्रस्तुति उर्वशी कुशवाह के शुद्ध कथक नृत्य की रही। इसमें तीनताल के अंतर्गत ठाट, उठान, आमद, तिहाई, गत, टुकड़े, तोड़े और जयपुर व लखनऊ घराने की पारंपरिक बंदिशें प्रस्तुत की गईं। तबले पर अरुण कुशवाह, नगमा व गायन में आस्तिक उपाध्याय, और पढ़ंत पर स्वाति यादव ने संगत की।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डीईओ आनंद शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक मनोहर जोशी ने दीप प्रज्ज्वलन किया।
अतिथियों और कलाकारों का स्वागत उप प्रशासक सिम्मी यादव और सहायक प्रशासक गिरीश तिवारी ने किया। कार्यक्रम का संचालन मयंक शुक्ला ने किया।
उषा रानी बैश्य और विद्वान डॉ. जादव बोराह ने शास्त्रीय नृत्य शैली सत्रिया प्रस्तु किया।

नृत्यांगना उषा रानी बैश्य ।