राजगढ़ के नरसिंहगढ़ में सावन के आखिरी सोमवार बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे। जिले में अलग-अलग जगह से आए कावड़िए पवित्र जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक किया विधायक मोहन शर्मा भी भगवान शिव की भक्ति में लीन नजर आए।
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उन्होंने स्वयं बाबा बैजनाथ महादेव के मंदिर में जलाभिषेक कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। अनुमान है कि शाम तक जिलेभर सहित आसपास के हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
हजार साल पहले बना था मंदिर बताया जाता है कि मंदिर की स्थापना सहारिया जनजाति के लोगों ने करीब एक हजार साल पहले की गई थी। उस समय इसे ‘टोपलिया महादेव’ के नाम से जाना जाता था। 17वीं शताब्दी में नरसिंहगढ़ के महाराज मेहताब सिंह ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया।
मंदिर में आराधना करने पहुंच रहे श्रद्धालु।
इतिहासकार श्याम सुंदर के अनुसार पुराने समय में यहां कोटा रियासत का प्रभुत्व था। यहां लगभग एक लाख लोग निवास करते थे। सहारिया जनजाति बांस की टोकरी बनाकर पहाड़ी के पीछे लगने वाले बाजार में बेचा करती थी। इसी जनजाति ने बड़े महादेव मंदिर की स्थापना की थी।
सन् 1681 में राजगढ़ रियासत के दो भाग होने के बाद दीवान परशुराम ने नरसिंहगढ़ की स्थापना की। उनके वंशजों ने बड़े महादेव की पहाड़ियों में बैजनाथ और बड़े महादेव मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। मंदिर के पास स्थित रामकुंड का जल सालभर भरा रहता है। मान्यता है कि यह पानी गठिया जैसे रोगों में लाभकारी है।
स्थानीय पंडित ध्रुव नारायण बताते हैं कि यह प्राचीन महादेव मंदिर आस्था का केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है। विशेष रूप से संतानहीन दंपत्तियों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
