सबसे खास बात बताते हुए रोहन कश्यप चौहान ने कहा, ‘हनुमान जी ने मुझे दर्शन दिए. मुझे सपना आया और कुछ ऐसा अनुभव हुआ कि मैंने तय कर लिया कि अब मुझे लौटना है अपनी जड़ों की ओर. मैं गर्व से कहता हूं कि मैंने सनातन धर्म को अपनाया है और यही मेरी आत्मा की सच्ची शांति है.’
दूसरे मुस्लिम युवक ने अपना नाम समीर बताया और कहा कि अब उसका मन भी बदल चुका है. उसने कहा, ‘मुझे सपने में भगवान शिव के दर्शन हुए और मैंने अनुभव किया कि यही सच्चा मार्ग है.’ समीर ने कहा कि वह बीते कुछ समय से लगातार मानसिक बेचैनी से गुजर रहा था. उसे दिशा नहीं मिल रही थी लेकिन जैसे ही मैंने शिव जी को महसूस किया, मुझे लगा कि अब मुझे लौटना है उसी रास्ते पर, जहां शांति है, जहां सच्चाई है. समीर अब नियमित मंदिर जाता है, पूजा करता है और कहता है कि सनातन धर्म कोई मजबूरी नहीं, यह आत्मा की पुकार है.
अनुभवों के चलते चुना यह रास्ता
खंडवा की इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या धर्म सिर्फ पहचान है या आत्मा की अनुभूति. इन युवाओं के मुताबिक, उन्होंने किसी दबाव में नहीं बल्कि अपने अनुभवों के चलते यह रास्ता चुना है. रोहन और समीर दोनों का मानना है कि भगवान की अनुभूति अगर सच्ची हो, तो धर्म खुद-ब-खुद सामने आ जाता है.
खंडवा महादेवगढ़ संरक्षक अशोक पालीवाल लोकल 18 से कहते हैं कि ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि आज का युवा खुद समझदारी से निर्णय ले रहा है. धर्म परिवर्तन अब सिर्फ राजनीति का विषय नहीं, यह आत्मा और अनुभूति की बात है.
धार्मिक घटना नहीं बल्कि आस्था की वापसी
बहरहाल खंडवा में रेहान और समीर जैसे युवाओं की घर वापसी सिर्फ एक धार्मिक घटना नहीं है बल्कि यह उस आस्था की वापसी है, जो वर्षों से भारत की आत्मा रही है. अब ये दोनों युवक न सिर्फ हिंदू धर्म का पालन कर रहे हैं बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं. कहानी चौंकाती है, सोचने पर मजबूर करती है और सबसे बड़ी बात, यह बताती है कि भगवान जब बुलाते हैं, तो रास्ता खुद-ब-खुद बन जाता है.