40 मिनट तक हार्ट बंद.. फिर जिंदा हो गया युवक: डॉक्टरों ने उम्मीद नहीं छोड़ी, एक मिनट में 100 बार सीपीआर देकर बचाई जान – Madhya Pradesh News

40 मिनट तक हार्ट बंद.. फिर जिंदा हो गया युवक:  डॉक्टरों ने उम्मीद नहीं छोड़ी, एक मिनट में 100 बार सीपीआर देकर बचाई जान – Madhya Pradesh News


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यह कहना है कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील चौधरी का, जिन्होंने एक मरीज को 40 मिनट बाद मौत के मुंह से वापस लाने में सफलता पाई है। दरअसल, 22 जुलाई को नागदा के रूपेटा गांव के रहने वाले सनी गहलोत सीने में दर्द की शिकायत लेकर डॉ. सुनील के क्लिनिक पहुंचे थे। इलाज के दौरान ही उन्हें कार्डियक अरेस्ट आ गया और उनकी धड़कन बंद हो गई।

डॉ. चौधरी और उनकी टीम ने उम्मीद नहीं छोड़ी और 40 मिनट तक सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) दिया और सुनील को मौत के मुंह से वापस ले आए। भास्कर ने डॉ. सुनील से बातचीत कर जाना कि आखिर उन 40 मिनट में क्या-क्या हुआ और क्यों उन्होंने समय बीतने के बावजूद हार नहीं मानी। पढ़िए रिपोर्ट…

बीपी चेक करवाते समय आया कार्डियक अरेस्ट डॉ. सुनील बताते हैं कि 22 जुलाई की सुबह से सनी को सीने में दर्द हो रहा था। पहले वह पास के ही एक लोकल डॉक्टर के पास चेकअप के लिए गया था। वहां उसने इसीजी करवाया और अपने गांव रुपेटा लौट गया, लेकिन दर्द बना रहा। दोपहर में वह अपने गांव से मेरे क्लिनिक आया था।

मैं जब उसका बीपी चेक कर रहा था तभी वह बेहोश होकर गिर पड़ा। उसका बीपी लो हो गया और पल्स जीरो हो गई। मैंने इसके तुरंत बाद CPR देना शुरू कर दिया गया था। हमने उसे आईसीयू पहुंचाया। इस दौरान भी सीपीआर जारी रहा।

सनी( पीली टीशर्ट) डॉक्टर सुनील से बीपी चेक करवा रहा था उसी वक्त उसे कार्डियक अरेस्ट आया और वह गिर पड़ा।

सनी( पीली टीशर्ट) डॉक्टर सुनील से बीपी चेक करवा रहा था उसी वक्त उसे कार्डियक अरेस्ट आया और वह गिर पड़ा।

1 मिनट में 100 से ज्यादा बार सीपीआर दिया डॉ. सुनील ने बताया कि ICU पहुंचते ही हमने 360 जूल का डीसी शॉक दिया और इमरजेंसी इंजेक्शन भी लगाया। इसके बाद दोबारा पल्स की जांच की, लेकिन तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। हमने लगातार सीपीआर देना शुरू कर दिया था। हर तीन मिनट में सीपीआर किया। एक मिनट में 100 से ज्यादा बार सीपीआर दिया।

उसे डीसी शॉक भी दिया, 11 बार से ज्यादा बार डीसी करंट दिया गया और हर बार सीपीआर के बाद पल्स चेक की गई, लेकिन कोई असर नहीं हो रहा था। उन्होंने बताया कि कार्डियक अरेस्ट के दौरान वेंट्रीकुलर फाइब्रिलेशन को तुरंत सीपीआर या इलेक्ट्रिक शॉक के जरिए कन्वर्ट करना जरूरी होता है, वर्ना मरीज की जान जा सकती है।

कई कोशिशों के बाद भी यह कन्वर्जन नहीं हो रहा था। आखिरकार 40 मिनट बाद जब 12वीं बार शॉक दिया गया तब दिल की धड़कन वापस आई, लेकिन उस वक्त बीपी शून्य था। जिसके तुरंत बाद बीपी बढ़ाने की दवाएं दीं और हार्टबीट बढ़ाने के लिए इंजेक्शन दिए गए।

45 मिनट बाद भी वापस आ सकती है हार्टबीट सुनील बताते है कि उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी क्योंकि एक स्टडी में बताया गया है कि अगर लगातार प्रयास किए जाएं, तो दिल की धड़कन 40-45 मिनट बाद भी वापस लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर डॉक्टर 15-20 मिनट बाद हार मान लेते हैं, लेकिन अगर सीपीआर और डीसी शॉक लगातार दिए जाएं, तो मरीज को बचाया जा सकता है।

इसे तुरंत शुरू करना बेहद जरूरी होता है। अगर 2-3 मिनट भी इंतजार किया गया, तो मरीज की जान बचना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि उस दौरान ब्रेन तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है और ब्रेन ‘डेड’ घोषित हो जाता है। एक बार ब्रेन डेड हो गया, तो फिर मरीज को वापस लाना लगभग नामुमकिन होता है।” इसलिए अगर ब्रेन को जिंदा रखना है तो बेहद जरुरी है कि हार्ट को डेड होने से पहले रिवाइव कर लें।

खराब लाइफ स्टाइल है मुख्य कारण डॉक्टर सुनील के मुताबिक सीने के दर्द को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। लोग अक्सर इसे गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। घबराहट, सांस फूलना जैसे लक्षण भी दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं के संकेत हो सकते हैं। हालांकि, बुजुर्गों में यह शुगर या दिल की बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

डॉ. सुनील के मुताबिक सबसे ज्यादा खानपान पर ध्यान देने की जरूरत है। तेल, घी, फैटी डाइट और फास्ट फूड से जितना हो सके उतना परहेज करना चाहिए। शुगर लेवल मेंटेन करना भी जरूरी है। इसी के साथ एक्सरसाइज को डेली रूटीन में शामिल करना बेहद जरूरी है। नियमित रूप से साइकलिंग, जॉगिंग और रनिंग दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होती है।

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करीब 40 मिनट की कोशिश के बाद युवक की जान बचा ली गई। पूरा वाकया अस्पताल के सीसीटीवी में कैद हुआ है।

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उज्जैन के पास नागदा में 30 साल के एक युवक को ओपीडी में डॉक्टर से चेकअप कराने के दौरान ही हार्ट अटैक आ गया। वह ओपीडी में कुर्सी से नीचे गिर पड़ा। डॉक्टरों ने फौरन CPR और इलेक्ट्रिक शॉक देना शुरू किया। पूरा वाकया अस्पताल के सीसीटीवी में कैद हुआ है। पढ़ें पूरी खबर…



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