ओबीसी को 52% आरक्षण की मांग: दतिया में DPSS ने सरकार को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम; सीएम हाउस घेरने की चेतावनी दी – datia News

ओबीसी को 52% आरक्षण की मांग:  दतिया में DPSS ने सरकार को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम; सीएम हाउस घेरने की चेतावनी दी – datia News


दतिया में दलित पिछड़ा समाज संगठन (DPSS) की जिला स्तरीय कार्यकर्ता बैठक मंगलवार को वरिष्ठ नेता एवं आज़ाद समाज पार्टी (भीम आर्मी) के प्रांतीय प्रभारी दामोदर सिंह यादव के निवास पर आयोजित की गई। बैठक में संगठन ने मध्यप्रदेश सरकार को चेतावनी दी कि यदि आगा

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दामोदर यादव ने कहा कि 1931 में हुई अंतिम जातिगत जनगणना के अनुसार ओबीसी वर्ग की जनसंख्या 52 प्रतिशत थी, लेकिन वर्तमान में उन्हें केवल 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, जो घोर अन्याय है। उन्होंने कहा, “हम 27 प्रतिशत की भीख नहीं, बल्कि अपने हक का 52 प्रतिशत आरक्षण चाहते हैं। जब हमारी जनसंख्या आधे से अधिक है, तो प्रतिनिधित्व भी उतना ही होना चाहिए। सरकार यदि आंकड़ों के आधार पर नीति बना रही है, तो फिर आरक्षण में यह भेदभाव क्यों?”

मानसून सत्र में दी थी चेतावनी यादव ने बताया कि 30 जुलाई को भोपाल में विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान DPSS ने प्रदर्शन किया था और उसी दौरान सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम भी दिया गया था। यदि तय समयसीमा में मांगें नहीं मानी गईं, तो सितंबर में प्रदेशभर के कार्यकर्ता भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे। इसमें दतिया जिले से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।

पत्रकारों से चर्चा में यादव ने कहा कि चाहे ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा की स्थापना का मुद्दा हो, भिंड में किसानों की ज़मीन वापसी की लड़ाई हो, छात्रसंघ चुनाव की बहाली हो या प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग, DPSS हर मोर्चे पर सरकार से लड़ाई को तैयार है।

सेंवढ़ा विधायक पर तीखा हमला सेंवढ़ा की एक महिला चिकित्सक को फोन कॉल के ज़रिए हटाने के मामले पर दामोदर यादव ने स्थानीय भाजपा विधायक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता के नशे में चूर भाजपा नेताओं ने प्रशासनिक मामलों में मनमानी शुरू कर दी है। उन्होंने सवाल किया, “अगर विधायक की सरकार में इतनी चलती है, तो आज तक इंदरगढ़ में बायपास क्यों नहीं बन सका? सेंवढ़ा के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर क्यों नहीं उपलब्ध कराए गए?”

यादव ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है। ऐसे में DPSS ही एकमात्र ऐसा संगठन है जो जनता के मुद्दों पर लगातार संघर्ष कर रहा है और एक सशक्त विपक्ष की भूमिका निभा रहा है।



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