घटना हनुमना तहसील के बधैया गांव की है।
मऊगंज जिले के हनुमना तहसील के बधैया गांव से मंगलवार को एक वीडियो सामने आया है। गांव का मुख्य रास्ता बंद होने के कारण एक बीमार महिला को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद खाट पर लिटाकर घर ले जाना पड़ा।
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सुरेंद्र पांडेय की बहू प्रियंका पांडेय की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें संजय गांधी अस्पताल रीवा में भर्ती कराया गया था। 4 अगस्त को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब परिजन उन्हें घर ला रहे थे, तो गांव का मुख्य रास्ता कटीले तारों से बंद मिला।
वाहन अंदर तक नहीं पहुंच सका। इसके बाद परिजन ने खाट की व्यवस्था की। उन्होंने पानी और कीचड़ से भरे रास्ते में किसी तरह महिला को घर तक पहुंचाया।
कंटीली तार लगाकर रास्ता बंद किया
सुरेंद्र पांडेय का कहना है कि यह रास्ता कई सालों से लोगों के उपयोग में रहा है। लेकिन गांव के ही छबिलाल सेन और बिजेंद्र मिश्रा ने इस रास्ते पर कंटीली तार लगाकर उसे बंद कर दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रास्ता बंद होने से करीब 6 से 7 परिवार बुरी तरह प्रभावित हैं। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई बंद हो गई है। मवेशी घर में कैद हैं। बरसात में स्थिति और भी खराब हो गई है।
स्थानीय गांव के लोगों ने ही आम रास्ते को तारों से बेड़कर बंद कर दिया है।
आज स्थानीय लोगों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में दिया आवेदन
5 अगस्त की शाम सुरेंद्र पांडेय ने इस समस्या को लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर आवेदन सौंपा। लेकिन वे कलेक्टर से मुलाकात नहीं कर सके। उनका कहना है कि इस संबंध में तहसील, थाना और अपर कलेक्टर को पहले भी शिकायत की जा चुकी है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सुरेंद्र पांडेय ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने रास्ता खोलने की कोशिश की, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “हम गरीब हैं, इसलिए कोई हमारी बात नहीं सुनता।”