श्रावण-भादौ मास में प्रतिदिन आयोजित होने वाली श्री महाकालेश्वर सांस्कृतिक संध्या के अंतर्गत मंगलवार को गायन एवं कथक नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने महाकाल के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित किया।
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श्री महाकाल महालोक में यह कार्यक्रम प्रतिदिन सायं 6 से 8 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। मंगलवार को उज्जैन की प्रीति देवले ने शिव भजनों की प्रस्तुति दी। उन्होंने सतसृष्टि तांडव रचयिता नटराज, शिव कैलाश के वासी, सदाशिव महाकाल ज्योर्तिमय और पी ले रे हरि नाम दीवानी भजन गाए।
इस दौरान हारमोनियम पर महेंद्र बुआ, तबले पर देवब्रत गुप्ता और साइड रिदम पर सक्षम देवले ने संगत दी। विभाष देवले, मनोज श्रीवास्तव, उल्हास मांजरेकर, राजेश सोहने, प्रेरणा सोहने और सुनीता जैन सहयोगी गायक के रूप में मौजूद थे।
कार्यक्रम की द्वितीय प्रस्तुति में समृद्धि चित्तौड़ा ने कथक नृत्य के माध्यम से शिव पंचाक्षर स्त्रोत, नाचे गिरधारी, सावरा गिरधर और मृदंगतरना प्रस्तुत किए। इस प्रस्तुति में ख्याति पाल, सिया मोरे, अनन्या खेडकर और इशानी पांचाल ने सहयोगी नृत्यांगनाओं के रूप में भाग लिया।
कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति इंदौर की कविता तिवारी के निर्देशन में समूह कथक नृत्य की हुई। इसमें शिव स्तुति तथा ध्रुपद आधारित शंकर प्रलयंकर मदन दहन कर की प्रस्तुतियां दी गईं। नंदनी सिकरवार, त्रिशा साध, पाखी बारापात्रे, वैष्णवी शिम्पी, माही पुनस्य और ऐश्वर्या बुंदेला ने सहयोगी नृत्यांगनाओं के रूप में भाग लिया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मंदिर समिति के पूर्व सदस्य विभाष उपाध्याय और श्री महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के सचिव वीरू पाक्ष जड्डीपाल ने दीप प्रज्ज्वलन किया। उप प्रशासक एसएन सोनी और सिम्मी यादव ने स्वागत किया जबकि कार्यक्रम का संचालन सुदर्शन अयाचित ने किया।
समृद्धि चित्तौड़ा ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी।