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Farming Tips: खंडवा के एक किसान ने गजब दिमाग लगाया. नौ फीट के फार्मूले से एक खेत में फल, अनाज, सब्जी सब उगा दी. पैदावार भी जोरदार है. जानें कैसे..
बाहेती ने खेतों में फलों के पौधों को 9-9 फीट की दूरी पर इस ढंग से लगाया कि एक पेड़ की पत्तियां दूसरे पौधे के लिए खाद बनती हैं. खेत में आम, नींबू, संतरा, सीताफल, कटहल और सुरजना जैसे कई फलदार पौधे हैं. इनके बीच खाली पड़ी ज़मीन का उपयोग वे हल्दी, अदरक और गेहूं जैसी फसलों के लिए करते हैं. एक खेत में फल, अनाज, सब्जी सब उगाते हैं.
बाहेती पूरी तरह जैविक खेती करते हैं. खेत में ही गोबर से कंपोस्ट खाद तैयार की जाती है. गोमूत्र, गुड़, बेसन आदि से विशेष घोल बनाकर उसे गोबर के गड्ढों में डाला जाता है. फिर यही खाद फलों और फसलों को दी जाती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फसलें स्वस्थ और ताकतवर होती हैं.
फलों के बीच की खेती भी जबरदस्त
सिर्फ फल नहीं, फलों के पेड़ों के बीच कीखाली जगह भी बेकार नहीं जाती. वहां वे हल्दी, गेहूं, अदरक जैसी फसलें ले रहे हैं. इस वजह से जमीन का पूरा उपयोग होता है और दोहरी आमदनी मिलती है. खेत में संतरे के फूलों की खुशबू मधुमक्खियों को आकर्षित करती है जिससे प्राकृतिक परागण होता है. वहीं, चीकू के पेड़ मिट्टी का कटाव रोकते हैं, नींबू के पौधे कीटों से रक्षा करते हैं और सीताफल भूमि की उर्वरता बढ़ाते हैं.
रासायनिक कीटनाशकों का बाहेती के खेत में कोई काम नहीं है. वे धतूरा, नीम की पत्ती और सुरजना की फली को उबालकर उसका कड़वा काढ़ा तैयार करते हैं और स्प्रे के रूप में फसल पर छिड़कते हैं. इससे फसल बीमारियों से भी बचती है और स्वास्थ्य पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता.
कॉलोनियों को दे रहे ऑक्सीजन का तोहफा
पुनासा की कॉलोनियों के बीच स्थित बाहेती का यह खेत केवल खेती का उदाहरण नहीं बल्कि पूरे इलाके के लिए एक ऑक्सीजन पॉकेट बन गया है. इस हरियाली से आसपास के लोगों को शुद्ध हवा मिलती है और पर्यावरण को भी राहत मिलती है. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस खेत को देखने आते हैं.