जर्जर भवन में बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं।
डिंडोरी के करंजिया जनपद मुख्यालय में 2018 से संचालित सरकारी कॉलेज अभी भी जर्जर भवन में चल रहा है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में 503 छात्र-छात्राओं को पढ़ाई करनी पड़ रही है।
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नए कॉलेज भवन का निर्माण दिसंबर 2023 में 6 करोड़ 17 लाख 82 हजार रुपए की लागत से शुरू हुआ था। इसे 18 महीने में पूरा होना था, लेकिन पैसों के अभाव में पिछले 8 महीने से निर्माण कार्य बंद पड़ा है।
कॉलेज के प्राचार्य प्रमोद वाष्पे ने बताया कि वर्तमान में 18 कर्मचारियों के साथ कॉलेज संचालित हो रहा है। जब छात्र पूरी संख्या में आते हैं, तो उन्हें बरामदे में चटाई बिछाकर जमीन पर बैठाना पड़ता है।
प्रोफेसर डॉ. प्रीति पांडेय के अनुसार, कक्षाओं में बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। कंप्यूटर क्लासेस के लिए जगह कम है। कैंपस में सबसे अधिक परेशानी छात्राओं और महिला स्टाफ को होती है, क्योंकि शौचालय तक नहीं हैं। भवन की कमी के कारण एडमिशन भी कम हो रहे हैं।
जनभागीदारी अध्यक्ष गजेंद्र करचाम ने बताया कि कॉलेज भवन की समस्या विभागीय अधिकारियों, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे को बताई गई है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि भवन का काम लगभग पूरा हो चुका है, बस थोड़ा काम बाकी है। अब वे भोपाल जाकर उच्च शिक्षा मंत्री से मिलेंगे।
पीएचई विभाग के प्रभारी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पारस सिंह ने कहा कि डिंडोरी उनके अतिरिक्त प्रभार में है। मंडला में बहुत काम है। उन्होंने कॉलेज भवन के बारे में अधिक जानकारी न होने की बात कही, लेकिन समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया।
जनभागीदारी अध्यक्ष गजेंद्र करचाम ने कहा कि उच्च शिक्षा मंत्री से शिकायत करेंगे।

इस भवन का कार्य पिछले 8 महीने से रुका हुआ है।

इस पुराने भवन में कॉलेज संचालित है।