‘ट्रंप ने पहले दी धमकी, फिर रूस भेजा दूत’
इसी बीच एक और अहम घटनाक्रम ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ भी इसी हफ्ते रूस पहुंचने वाले हैं. सूत्रों के अनुसार, विटकॉफ़ पहले ही अमेरिका से रवाना हो चुके हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उनकी मॉस्को यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा है कि वह रूसी नेतृत्व से मिलने जा रहे हैं, हालांकि बातचीत के एजेंडे का खुलासा नहीं किया गया.
डोभाल की यात्रा क्यों इतनी अहम?
सूत्रों की मानें तो डोभाल की यह यात्रा कई परतों में बसी है. एक ओर जहां भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गहन बातचीत होनी है, वहीं यह संदेश भी स्पष्ट है कि भारत किसी भी वैश्विक दबाव में आकर अपने रणनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगा.
भारत ने अमेरिका को दिखाया आईना
ट्रंप की टिप्पणी पर भारत के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, इसे ‘राजनीति से प्रेरित, अनुचित और बेबुनियाद’ बताया. मंत्रालय ने यह भी जोड़ा कि भारत का तेल आयात उसके घरेलू हितों और बाज़ार स्थिरता से जुड़ा है. इसके साथ ही यह भी याद दिलाया कि खुद अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश आज भी रूस के साथ व्यापारिक संबंध रखते हैं.
ऐसे में यह सवाल अब और भी अहम हो गया है: क्या अजीत डोभाल की मास्को मौजूदगी ट्रंप के ‘टैरिफ तीर’ का एक सधा हुआ जवाब है? जवाब शायद यही है- भारत दोस्त के द्वार पर खड़ा है, लेकिन किसी के दबाव में नहीं.