न मिक्सर न कोई मसाला…ओखली में पिसती है निमाड़ की ये लाल चटनी, स्वाद ऐसा कि चाटते रहेंगे प्लेट!

न मिक्सर न कोई मसाला…ओखली में पिसती है निमाड़ की ये लाल चटनी, स्वाद ऐसा कि चाटते रहेंगे प्लेट!


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Nimar Special Lal Chatni Recipe: निमाड़ की पारंपरिक लाल मिर्च और दाने की चटनी स्वाद में जितनी तीखी, सेहत में उतनी ही लाजवाब है. जानिए इसकी देसी रेसिपी जो ओखली में पीसकर बनाई जाती है और हर निवाले को बना देती है …और पढ़ें

मध्यप्रदेश का निमाड़ अंचल अपने देसी स्वाद और सीधे दिल को छू लेने वाली परंपराओं के लिए मशहूर है. यहां की बोली, लोकगीतों और उत्सवों जितना ही खास है यहां की रसोई. और अगर बात हो स्वाद की रगों में दौड़ने वाली चटनी की, तो “दाने-मिर्च की चटनी” का नाम सबसे ऊपर आता है.

यह चटनी कोई आम चटनी नहीं, यह परंपरा, प्यार और आत्मीयता का स्वाद है. निमाड़ में जब भी कोई खास मेहमान आता है, तो थाली में भोजन से पहले जो चीज सबसे पहले परोसी जाती है वो है यही चटनी.

क्या बनाता है इसे खास?

सबसे खास बात यह कि यह चटनी मिक्सर से नहीं, पारंपरिक ओखली-सोटा (मुसल) से पीसी जाती है. यही देसी तरीका इसकी आत्मा है. जब मूंगफली के दाने, लाल मिर्च और लहसुन ओखली में मिलते हैं, तो जो स्वाद निकलता है, वो किसी इलेक्ट्रिक मशीन में नहीं मिल सकता.

सामग्री जो स्वाद और सेहत दोनों दे

लाल मिर्च (देशी) स्वाद के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर.

भुने हुए दाने (मूंगफली/तिल) प्रोटीन और हेल्दी फैट का बेहतरीन स्रोत.

लहसुन गैस, कोलेस्ट्रॉल और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए वरदान.

सरसों का तेल या पानी स्वाद में देसीपन और पाचन में सहायक.

नमक, हींग और नींबू स्वाद को बढ़ाने वाले देसी साथी.

कैसे बनती है ये चटनी?

इस चटनी को बनाने के लिए सबसे पहले मिर्चों को हल्का भून लिया जाता है ताकि उनकी तीखापन कंट्रोल में रहे. फिर भुने दाने और मिर्च को ओखली में लहसुन और नमक के साथ मिलाकर कूटा जाता है. जरूरत पड़ने पर थोड़ा तेल या पानी मिलाया जाता है. जब यह दरदरा मिश्रण बन जाए, तब चटनी तैयार मानी जाती है.

सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत में भी दम

लोग सोचते हैं कि तीखी चटनी से नुकसान होगा, लेकिन यह देसी चटनी असल में हेल्थ बूस्टर है. इसमें मौजूद तत्व न सिर्फ इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, बल्कि पाचन को सुधारते हैं और शरीर को एनर्जी भी देते हैं.

गांव से शहर तक, स्वाद का सफर

आज निमाड़ के लोग चाहे इंदौर में हों या मुंबई में, इस चटनी को बोतल में भरकर ले जाते हैं. यह सिर्फ एक स्वाद नहीं, एक कनेक्शन है अपने गांव, अपने बचपन और अपनी मिट्टी से. बाजरे की रोटी, भिंडी की सब्जी या पिठला इनके साथ अगर यह चटनी हो, तो भोजन का मज़ा दुगना हो जाता है.

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न मिक्सर न कोई मसाला…ओखली में पिसती है निमाड़ की ये लाल चटनी!



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