तहसीलदारों ने अपने शासकीय वाहन वापस कर दिए हैं।
बालाघाट में तहसीलदार और नायब तहसीलदार बुधवार से न्यायालयीन और गैर न्यायालयीन काम के विभाजन के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। उन्होंने बुधवार से काम और कलम बंद हड़ताल शुरू कर दी है।
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अपने शासकीय वाहनों को कलेक्ट्रेट में सौंपे
सर्किट हाउस में एकत्रित हुए जिले के तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने अपने शासकीय वाहनों को कलेक्ट्रेट में सौंप दिया है। दरअसल, बीते महीने कलेक्टर ने सरकार के आदेश पर राजस्व सेवा के कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को न्यायालयीन और गैर न्यायालयीन काम का दायित्व सौंपा था।
कार्य विभाजन का आदेश वापस लेने की मांग
तहसीलदार और नायब तहसीलदार इस कार्य विभाजन को मनमाना और नियम के खिलाफ बता रहे हैं। उनकी मांग है कि कार्य विभाजन के कलेक्टर आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए। उनका कहना है कि यह विभाजन बिना किसी अध्ययन और सिफारिश के लागू किया गया है।
बालाघाट जिले के 21 तहसीलदारों ने कार्य विभाजन का विरोध किया।
21 तहसीलदारों ने बालाघाट में जताया विरोध
मध्यप्रदेश राजस्व अधिकारी कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के जिलाध्यक्ष तहसीलदार भूपेंद्र अहिरवार ने बताया कि जिले के सभी 21 तहसीलदार और नायब तहसीलदार आदेश वापस होने तक आपदा प्रबंधन के कामों को छोड़कर अपने कार्यों से विरत रहेंगे।
तहसीलदार बोले-विभाजन नीति हमें स्वीकार्य नहीं
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके सेवा नियम में राजस्व के साथ ही कार्यपालन मजिस्ट्रेट के कार्यों का निर्वहन शामिल है। लेकिन नए विभाजन में किसी को न्यायालय तो किसी को कार्यपालिक मजिस्ट्रेट का दायित्व सौंप दिया गया है। यह विभाजन नीति उन्हें स्वीकार्य नहीं है।
इस हड़ताल से राजस्व संबंधित कामों के अलावा जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, नामांतरण, बंटवारा, सीएम हेल्पलाइन और पीएम किसान सम्मान निधि सहित अन्य राजस्व कार्यों पर रोक लग गई है।