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Government School Ground Report Balaghat: बालाघाट में अजब स्कूल 4 बच्चों पर 2 सरकारी टीचर, लेकिन 23 बच्चों के लिए एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है. जानिए कैसे अतिथि शिक्षक चला रहे पढ़ाई.
बालाघाट जिले में ये गजब का स्कूल
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड से यह मामला सामने आया है जहां गरीबों के बच्चों के भविष्य के साथ कथित तौर पर बड़ा खिलवाड़ हो रहा है. यह पूरा मामला कटंगी विकासखंड में एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला टेकाड़ी (का) नाम के स्कूल से जुड़ा है. यहां एक ही कैंपस में कक्षा एक से लेकर आठ तक की कक्षाएं लगती है. लेकिन विडंबना ये है कि एक तरफ प्राइमरी स्कूल है, जहां पर महज चार बच्चे है. यहां पर कक्षा एक में 1 तो दूसरी और चौथी में शून्य बच्चें दर्ज है. वहीं, तीसरी में एक और कक्षा पांच में एक बच्चा पढ़ता है.
इसी कैंपस में माध्यमिक स्कूल की कक्षाएं भी संचालित होती है. माध्यमिक स्कूल की कक्षा छटवीं में 6, सातवी में 9 और आठवीं में 8 बच्चे पढ़ रहे है यानी टोटल 23 बच्चे दर्ज है और इन्हें पढ़ाने के लिए एक भी सरकारी शिक्षक नहीं है. इन बच्चों का भविष्य अतिथि शिक्षकों पर टीका हुआ है. यहां पर बच्चों को पढ़ाने के लिए तीन अतिथि शिक्षक आते हैं.
सरकार के इस नियम से हो रहा है ऐसा हाल
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार 60 बच्चों की दर्ज संख्या में 02 शिक्षकों की नियुक्ति होनी है लेकिन टेकाड़ी (का) स्कूल को एकीकृत होने का फायदा मिल रहा है. वहीं, मीडिल स्कूल में विषयों की संख्या के आधार पर शिक्षकों का चयन होता है.
इसलिए घट रही स्कूल में बच्चों की संख्या
गांव में 02 प्राइवेट स्कूल होने का हवाला दिया. सरकारी स्कूल में दर्ज संख्या की कमी होना यह एक बड़ा कारण हो सकता है. लेकिन वास्तविकता यह है कि सरकार के प्राथमिक स्कूलों की विश्वसनीयता लगातार कमजोर हो रही है. मध्याह्न भोजन जैसी स्कीम चलने की वजह से इन स्कूलों को जिले में भात खाया स्कूल के नाम से पुकारा जाता है. ऐसा मान लिया गया है सरकार के इन प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती सिर्फ बच्चों को खाना परोसा जाता है. यहीं कारण है कि कोई भी समझदार व्यक्ति अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं भेजना चाहता है यहां तक की सरकारी शिक्षक भी अपने बच्चों को वह जिस स्कूल में पढ़ाने के लिए जाते है वहां भर्ती करवाते है. यह हाल अकेले विकासखंड कटंगी का नहीं बल्कि समूचे बालाघाट जिले के लगभग 90 फीसदी प्राथमिक स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था का है.