जिलास्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में विवाद: फेदर की जगह दी प्लास्टिक शटल, कोच को बना दिया रैफरी – Balaghat (Madhya Pradesh) News

जिलास्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में विवाद:  फेदर की जगह दी प्लास्टिक शटल, कोच को बना दिया रैफरी – Balaghat (Madhya Pradesh) News


बालाघाट में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित जिलास्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। अभिभावक डॉ. सुनील कुमार रजक ने फेदर शटल की जगह प्लास्टिक शटल के उपयोग पर आपत्ति जताई है।

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प्रतियोगिता में कोच को ही रेफरी बनाए जाने का मुद्दा भी उठा है। अभिभावकों का कहना है कि इससे कोच अपने छात्रों को अनुचित लाभ पहुंचा सकते हैं। डॉ. रजक ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर खेल अधिकारी से बात की गई थी और उन्होंने फेदर शटल के उपयोग को स्वीकार भी किया था।

टूर्नामेंट में अंडर-14, 17 और 19 वर्ग में बालाघाट, वारासिवनी, लांजी और लालबर्रा से करीब 300 खिलाड़ियों ने भाग लिया। दो दिवसीय इस प्रतियोगिता को जिला शिक्षा कार्यालय के क्रीड़ा विभाग ने आयोजित किया।

रेफरी नियुक्ति में भी विवाद सामने आया है। आयोजक संस्था के व्यायाम शिक्षक हरीश धुवारे ने छह रेफरी के नाम बताए, जिनमें से एक हर्षिता मुवनेश्वर ने रेफरी बनने से इनकार किया है।

जिला क्रीड़ा अधिकारी दीपक गिरी गोस्वामी ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि जिला और संभाग स्तर की प्रतियोगिताएं प्लास्टिक शटल से ही होती हैं। उन्होंने बताया कि यदि कोई खिलाड़ी फेदर शटल का खर्च वहन करने को तैयार है, तो उसका उपयोग किया जा सकता है।

कोच को रेफरी बनाए जाने के सवाल पर वह बताते है कि चूंकि हमारा पास कोई आप्शन नहीं था, इसलिए हमने, इन्हें रखा। जबकि जानकार बताते है कि फेदर शटल और प्लास्टिक शटल में काफी अंतर है, जहां फेदर शटल की स्पीड कम होने से खिलाड़ियों को संभालने का मौका मिलता है, वही प्लास्टिक शटल की रफ्तार तेज होती है।



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