स्नान के दौरान साबुन-शैंपू और कपड़ा धुलाई पर रोक
बड़वानी में प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा नदी का बैकवाटर हाल के दिनों में कम होने लगा है। जिला मुख्यालय के पास रोहिणी तीर्थ जलमग्न होने के कारण श्रद्धालु करीब दो किलोमीटर दूर पुराने फिल्टर प्लांट के पास बैकवाटर किनारे स्नान-पूजन और दर्शन कर रहे हैं।
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समिति और भक्तों द्वारा बैकवाटर किनारे स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। नर्मदा पूजन-दर्शन और स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की चरण पादुकाएं 20 फीट पूर्व ही उतरवाई जा रही हैं। स्नान के दौरान साबुन, शैंपू, सोडा, कपड़ा धुलाई और वाहन धुलाई पर प्रतिबंध लगाया गया है।
नर्मदा की स्वच्छता के लिए पॉलीथीन, नारियल की नट्टी आदि वेस्ट सामग्री को डस्टबिन में एकत्रित किया जा रहा है। रविवार को समिति सदस्यों और भक्तों ने बैकवाटर किनारे सफाई अभियान चलाया। उन्होंने हाथों में झाड़ू और बुहारा थामकर साफ-सफाई की।
यह अभियान प्रतिदिन के साथ सोमवार दोपहर को विशेष रूप से चलाया जाता है। समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन निःशुल्क चाय का स्टॉल बैकवाटर किनारे संचालित किया जा रहा है। प्रतिमाह की अमावस्या पर कन्या पूजन और भोज का आयोजन भी किया जाता है।
समिति के सचिन शुक्ला ने बताया कि नर्मदा बैकवाटर अभी 130.70 मीटर पर है। इससे राजघाट रोहिणी तीर्थ जलमग्न है। घाट और मंदिर जलमग्न होने से जहां बैकवाटर का किनारा है, उसे ही घाट मानते हुए समिति द्वारा रोहिणी तीर्थ की व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं।
विशेष रूप से साफ-सफाई का ध्यान दिया जाता है। माइक से मुनादी कर श्रद्धालुओं को स्वच्छता का संदेश दिया जाता है। इस कार्य में मां नर्मदा घाट निर्माण समिति, रोहिणी सेवार्थ सामाजिक समिति और अन्य समितियों सहित नर्मदा भक्त निस्वार्थ सेवाएं दे रहे हैं।