जन्माष्टमी पर 6 शुभ योगों का संयोग, बाजार में झूले-बांसुरी व बाल गोपाल प्रतिमाओं की मांग – Guna News

जन्माष्टमी पर 6 शुभ योगों का संयोग, बाजार में झूले-बांसुरी व बाल गोपाल प्रतिमाओं की मांग – Guna News



श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर नगर में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बन चुका है। मंदिरों से लेकर घरों तक राधे-कृष्ण के भजनों की गूंज और जन्मोत्सव की तैयारियों की धूम मची है। नयापुरा स्थित महाराष्ट्र समाज के गोपाल मंदिर, पंचमुखी मंदिर, लक्ष्मीनारायण

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इस बार जन्माष्टमी पर वृद्धि, ध्रुव, श्रीवत्स, गजलक्ष्मी, ध्वांक्ष और बुधादित्य जैसे छह शुभ योगों का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे पर्व का महत्व और बढ़ गया है। यह योग धन, सुख, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। पंडित सतीश शास्त्री ने बताया कि निर्णय सागर सिंधु पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि 15 अगस्त रात 11:49 से प्रारंभ होकर 16 अगस्त रात 9:35 तक रहेगी, चूंकि तिथि सूर्योदय व्यापिनी है, अत: पर्व 16 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। बाजारों में जन्माष्टमी की रौनक देखते ही बनती है। व्यापारी मथुरा, नाथद्वारा, दिल्ली और अहमदाबाद से मूर्तियां, झूले व श्रृंगार सामग्री मंगा चुके हैं। ठाकुरजी की पोशाकों में राजस्थानी, लहरिया और जयपुरी ड्रेस की सबसे ज्यादा मांग है। मंदिरों और बाजारों की साज-सज्जा नगर में भक्ति और उल्लास का भाव भर रही है।

श्रद्धालु खरीद रहे शृंगार सदर बाजार, मानस भवन क्षेत्र और प्रमुख बाजारों में बाल गोपाल के श्रृंगार की सामग्री की मांग चरम पर है। दुकानदार महेंद्र सिंह रघुवंशी के अनुसार इस वर्ष जयपुरी, मथुरा और राजस्थानी लहरिया पोशाकें पहली पसंद बनी हैं। जरी वाली पोशाकें 50 से 1800 रुपए तक में बिक रही हैं। वहीं हार, मुकुट, बांसुरी और मोर पंख जैसी सजावटी सामग्री भी खूब खरीदी जा रही है। श्रद्धालु घर नुमा झूले और आकर्षक टोकरियां भी खरीद रहे हैं, जिसमें बाल गोपाल को झुलाने की परंपरा निभाई जाएगी। भक्तों का विशेष उत्साह इस बार साफ दिखाई दे रहा है।

पोशाकों की डिमांड में इजाफा गणेश स्टोर, सदर बाजार के संचालक रजनीश प्रजापति ने बताया कि अब श्रद्धालु हाथ की बजाय मशीन से बनी ड्रेस को प्राथमिकता दे रहे हैं। हर रंग और स्टाइल की पोशाक 20 से 150 रुपए में उपलब्ध है, जो मशीन की उत्कृष्ट फिनिशिंग के कारण आकर्षक लगती है। मुकुट, हार, बाजूबंद जैसे शृंगार दिल्ली और मथुरा से मंगाए गए हैं। पहले जहां मोती वर्क की भारी पोशाकों की मांग थी, अब हल्की और सुंदर दिखने वाली ड्रेस को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। बाजार में यह बदलाव नई पीढ़ी की पसंद और सुविधा को दर्शा रहा है।



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