मंदसौर जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर मुल्तानपुरा में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के 6 मरीज मिले हैं। इनमें से 3 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। 3 अन्य मरीज अभी भी वेंटिलेटर पर हैं।
.
स्थिति की गंभीरता को देख WHO (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन) की 5 सदस्यीय टीम के साथ स्टेट और सेंट्रल की टीमें मंगलवार को मुल्तानपुरा पहुंची और सभी टीमों ने सामूहिक रूप से लगभग 6 घंटे तक गांव के तमाम क्षेत्रों में सर्वे कर डोर टू डोर जाकर लोगों से बात की और उन्हें सतर्क रहने की हिदायत दी।
संक्रमित मरीजों के साथ परिवारजनों के ब्लड सैंपल लिए इससे पहले मन्दसौर स्वास्थ्य विभाग की 4 टीमों के 32 कर्मचारी सर्चिंग में जुटे थे और डोर टू डोर जाकर लोगों से बात की और सतर्कता बरतने की हिदायत दी थी।
20 लोग स्वस्थ्य हो चुके हैं सीएमएचओ गोविंद सिंह चौहान के अनुसार, पिछले 15 दिनों से गांव में सर्वे जारी है। 8331 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। 56 लोगों को निगरानी में रखा गया था। इनमें से 20 लोग स्वस्थ हो चुके हैं।
36 लोग अभी भी निगरानी में हैं। इन्हें दस्त, सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षण हैं। WHO, राज्य और केंद्र की टीमों ने मरीजों के घरों से खाद्य सामग्री और रक्त के नमूने एकत्र किए हैं। गांव में पसरी गंदगी, सड़क किनारे पड़े कचरे के ढेरों को बीमारी की मुख्य वजह बताया जा रहा है।
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी के लक्षण इस बीमारी में हाथ पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी, मासपेशियों में तेज़ी से बढ़ती कमजोरी, चलने फिरने में नाकामी, सांस लेने में परेशानी और पानी या खाना निगलने में तकलीफ होती है।
6 लोग चपेट में आए, 3 रिकवर बता दें कि लगभग 10 हजार की आबादी वाले गांव मुल्तानपुरा में 6 लोग गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) संक्रमण की चपेट में आए। इनकी उम्र 2 वर्ष से 21 साल है। इस बीमारी से गांव के तीन लोग खुशी, साहिल और अरहान इस बीमारी से जंग जीत चुके हैं।
वहीं तीन लोगों का इलाज जारी है। ताजमूल अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में वेंटिलेटर पर हैं, आरज़ू इंदौर के एमवाय अस्पताल में वेंटिलेटर पर है और मोहम्मद सैफू इंदौर में अरविंदो में वेंटिलेटर पर उपचाररत हैं।
देखिए जांच के दौरान की तस्वीरें

टीम ने लोगों के सैंपल लिए

