सतना का वायरल फौजी! ‘बॉर्डर’ से मिली प्रेरणा, कमांडो लुक बना पहचान

सतना का वायरल फौजी! ‘बॉर्डर’ से मिली प्रेरणा, कमांडो लुक बना पहचान


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Satna News: संजय सिंह बघेल ने बचपन में बॉर्डर फिल्म देखी थी. जिसके बाद उनके मन में देश के लिए कुछ करने का जुनून और गहरा हो गया. उसी दिन उन्होंने तय किया कि वह सेना में भर्ती होंगे और भारत माता की सेवा करेंगे.

सतना. मध्य प्रदेश के सतना की सड़कों पर अगर आपको कोई शख्स सिर पर कमांडो टोपी, सीने पर तमतमाते मेडल्स, आर्मी जैसी ड्रेस और चाल में फौजी अंदाज दिखाता मिल जाए, तो समझ जाइए वो संजय सिंह बघेल हैं. इनका ड्रेसिंग सेंस इतना अनोखा है कि लोग उन्हें देखते ही रुक जाते हैं. सुबह से रात तक इनका लुक बिल्कुल किसी फिल्मी कमांडो जैसा रहता है और यही वजह है कि वह सोशल मीडिया से लेकर शहर की गलियों तक चर्चा में बने रहते हैं. संजय के जीवन में देशभक्ति का रंग बचपन से ही गहरा था. उनके पिता सीआईएसएफ में थे और 2015 में शहीद हो गए थे. संजय ने 18 साल की उम्र में सेना में भर्ती होकर 18 साल 8 महीने देश की सेवा की. उनकी पहली पोस्टिंग सियाचिन में हुई, जहां -35 से -70 डिग्री तापमान में उन्होंने एक साल ड्यूटी की. इसके बाद वह देहरादून, जम्मू-कश्मीर, नगालैंड और भीमापुर जैसे कई चुनौती भरे इलाकों में तैनात रहे.

बचपन में बॉलीवुड की बॉर्डर फिल्म देखने के बाद संजय सिंह बघेल के मन में देश के लिए कुछ करने का जुनून और गहरा हो गया था. उसी दिन उन्होंने तय कर लिया था कि वह सेना में जाएंगे और भारत माता की सेवा करेंगे. अपने सैन्य करियर में उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया लेकिन हर बार अपने हौसले और अनुशासन से उन्हें पार किया. पारिवारिक जिम्मेदारियों और मां की खराब तबीयत के कारण संजय ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी उन्होंने देशसेवा का सफर नहीं रोका. 2018 में जब वह लौटे तो मैहर, कटनी और सतना रेलवे स्टेशन पर उनका भव्य स्वागत हुआ. इसके बाद उन्होंने संकल्प लिया और अपने निजी खर्च से रिटायर्ड सैनिकों का धूमधाम से स्वागत करने की परंपरा शुरू की.

दूर से पहचान लेते हैं लोग
संजय सिंह बघेल ने लोकल 18 से कहा कि बचपन से ही उन्हें आर्मी लुक का शौक था लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्होंने इसे अपनी पहचान बना लिया. वह अपने कपड़े, ज्वेलरी, लॉकेट, टैटू और एक्सेसरीज खुद डिजाइन कर ऑर्डर देते हैं. उनकी खुली जीप जब सड़कों पर दौड़ती है, तो लोग दूर से ही पहचान लेते हैं.

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