Last Updated:
Train Facts: ट्रेन के इंजन में टॉयलेट होता है या नहीं? इस सवाल का जवाब बेहद चौंकाने वाला है. हालांकि, एक्सपर्ट के अनुसार, रेलवे पुरानी व्यवस्था को बदलने की सोच रहा है… (रिपोर्ट: आकाश निषाद)
क्या कभी आपके मन ये सवाल आया कि ट्रेन के इंजन में टॉयलेट होता है या नहीं? अगर आपको इसका जवाब नहीं पता तो इस रिपोर्ट में आपको बेहद दिलचस्प बात पता चलने वाली है. दरअसल, ट्रेन के इंजन में किसी भी तरह का टॉयलेट नहीं होता, इंजन में सिर्फ मेकैनिज्म सिस्टम होता है.

लाेको पायलट के बैठने के लिए महज सीट. इसके अलावा इंजन में किसी तरीके की सुविधा लोको पायलट के लिए नहीं होती है. फिर यह सवाल उठना लाजिमी है कि इस दौरान ड्राइवर आखिर क्या करते होंगे?

रिटायर्ड रेलवे अधिकारी एसके श्रीवास्तव ने लोकल 18 को बताया, इंजन में टॉयलेट जैसी व्यवस्थाएं नहीं होती हैं. इसके लिए ड्राइवर को अगले स्टेशन का इंतजार करना होता है.

अमूमन देखा जाए, हर ट्रेन चंद मिनट के बाद किसी न किसी स्टेशन में जरूर ठहरती है, यदि ट्रेन छोटी है, तब उसका स्टॉपेज कम से कम 1 मिनट का होता ही है, बल्कि बड़ी ट्रेनों का बड़े स्टेशनों में स्टॉपेज 2 मिनट से लेकर 15 मिनिट तक का होता है.

इस दौरान ड्राइवर को टॉयलेट जैसी अन्य सुविधा के लिए भरपूर समय होता है. इंजन में टॉयलेट का न होना इसकी पहली वजह इंजन में स्पेस की कमी है. क्योंकि, इंजन में सीमित जगह ही होती है. इसमें मेकैनिज्म फिट होता है. ऐसे में स्पेस की कमी भी होती है.

इसके अलावा तकनीकी और सुरक्षा कारण भी होते हैं. इसके कारण शुरू से ही इंजन में इस तरह की व्यवस्था नहीं होती. जिसके चलते लोको पायलट को स्टेशन आने का इंतजार करना होता है, हालांकि स्टेशनों में ड्राइवरों के लिए विशेष रेस्टरूम होते हैं.

रिटायर्ड रेलवे अधिकारी एसके श्रीवास्तव ने बताया लोको पायलट लगातार यह मांग करते आए हैं कि इंजन में टॉयलेट नहीं होने से लंबी दूरी और गर्मी में अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

रेलवे विचार भी कर रहा है, हालांकि कुछ नए और आधुनिक इंजनों में टॉयलेट लगाने पर विचार जरूर कई बार किया जा चुका है. इससे लाेको पायटल को जरूर राहत मिलेगी, जिसको लेकर रेलवे प्लानिंग भी कर रहा है.