अहिल्या बाई ने बनवाया था सोने का झूला, चुराने वाले हो गए थे अंधे, दोबारा मिला तो घट गया वजन! आज भी यहां रखा

अहिल्या बाई ने बनवाया था सोने का झूला, चुराने वाले हो गए थे अंधे, दोबारा मिला तो घट गया वजन! आज भी यहां रखा


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Janmashtmi Special: यहां भगवान श्रीकृष्ण बाल गोविंदा के रूप में मौजूद हैं, जो सोने के झूले पर झूलते हैं. यह झूला करीब 300 साल पुराना है और इसे महारानी अहिल्या बाई होलकर ने बनवाया था. जानें कहानी… 

Khargone News: मध्य प्रदेश के खरगोन की धार्मिक नगरी महेश्वर के ऐतिहासिक किले में एक खास पूजा घर है, जहां भगवान श्रीकृष्ण बाल गोविंदा के रूप में मौजूद हैं, जो सोने के झूले पर झूलते हैं. यह झूला करीब 300 साल पुराना है. इसे महारानी अहिल्या बाई होलकर ने बनवाया था. जन्माष्टमी पर यहां का नजारा देखने लायक होता है. झूले के पास चांदी, पारे और जड़ी-बूटियों से बना एक दिव्य शिवलिंग है. साथ ही कई देवी देवताओं की सोने-चांदी की दुर्लभ मूर्तियां भी रखी हैं.

दरअसल, महेश्वर किले के अंदर राजवाड़ा परिसर में अहिल्या बाई का एक निजी पूजा घर है. कहते हैं कलयुग में अहिल्या बाई भगवान शिव की सबसे बड़ी उपासक रही हैं. लेकिन, वह कृष्ण भक्त भी थीं. उनकी सास कृष्णा बाई भी कृष्ण की अनन्य भक्त रही हैं. भगवान कृष्ण के लिए अहिल्या बाई ने खासतौर पर सोने का झूला बनवाया था. इस झूले पर बाल गोपाल पूरे वर्ष झूला झूलते हैं. लेकिन, जन्माष्टमी पर यहां विशेष श्रृंगार होता है, जो आकर्षण का केंद्र रहता है. हालांकि, यह झूला एक बार चोरी भी हो चुका है.

पहले 40 किलो, अब 18-20 किलो
इतिहासकार हरीश दुबे के मुताबिक, यह झूला पहले करीब 40 किलो का था. लेकिन, साल 1955 में महाराष्ट्र के डकैत गोकुल गिरि और उसके साथियों ने इसे चुरा लिया. कहा जाता है कि नगर की सीमा पार करने से पहले ही चोर अचानक अंधे हो गए, उन्हें दिखना बंद हो गया. मानो कोई अदृश्य शक्ति उन्हें रोक रही हो, तब बचने के लिए चोरों ने झूले को वहीं जमीन में गाड़ दिया. बाद में चोर पकड़े गए और झूला बरामद हुआ. चोरी में झूला टूट गया था, जिसे नासिक के कारीगरों ने दोबारा बनाकर तैयार किया. अब इसका वजन लगभग 18 से 20 किलो है.

जन्माष्टमी पर खास सजावट
हर साल जन्माष्टमी के मौके पर यहां लड्डू गोपाल का भव्य श्रृंगार किया जाता है. भगवान को सोने के झूले पर झुलाया जाता है और भजन-कीर्तन होते हैं. यह पूजा घर आम लोगों के लिए वर्षभर खुला रहता है, लेकिन झूले और मूर्तियों को छूना मना है. यहां केवल होलकर परिवार और पुजारी ही अंदर जाकर पूजा करते हैं. चोरी के बाद यह मंदिर कड़े सुरक्षा के घेरे में रहता है. आने वाले पर्यटक एवं श्रद्धालु खिड़की से ही दर्शन कर पाते हैं.

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