39 फोन और वो तीन घंटे…वनरक्षक ने बताया वो खौफनाक सच, जब किसान बना था बाघ का निवाला

39 फोन और वो तीन घंटे…वनरक्षक ने बताया वो खौफनाक सच, जब किसान बना था बाघ का निवाला


3 मई 2025, बालाघाट जिले के आखिरी छोर पर बसा कुड़वा गांव. सुबह-सुबह किसान प्रकाश पाने अपने बेटे शुभम के साथ खेत की ओर निकलते हैं. शुभम तो कुछ देर बाद घर लौट आता है, लेकिन पिता वहीं रहते हैं. रात बीत जाती है, और सुबह तक भी प्रकाश घर नहीं लौटते. बेटा और मां खेत की ओर भागते हैं… और वहां जो देखते हैं, उससे उनके होश उड़ जाते हैं, प्रकाश पाने बाघ का शिकार बन चुके थे.

खबर जंगल की आग की तरह पूरे गांव में फैल गई. देखते-ही-देखते गुस्से से भरी भीड़ इकट्ठी हो गई. इस बीच मौके पर ड्यूटी निभाने पहुंचे वनरक्षक गुलाब सिंह उईके को ग्रामीणों का सामना करना पड़ा. लेकिन यह सामना एक खतरनाक मोड़ लेने वाला था.

गुलाब सिंह बताते हैं कि गांव वाले इतने गुस्से में थे कि किसी की सुनने को तैयार नहीं थे. कुछ लोग हाथ में कुल्हाड़ी, डंडे और पेट्रोल की बोतल लेकर आए. मैं डर गया और अपनी जान बचाने के लिए पास के एक घर में घुसकर दरवाजे-खिड़कियां बंद कर लीं.

39 बार फोन, फिर भी मदद नहीं
घर में खुद को कैद करने के बाद गुलाब सिंह ने तीन घंटे में अपने सीनियर अफसर को 39 बार फोन किया, लेकिन हालात जस के तस रहे. रेंजर ने बस इतना कहा कि “पुलिस आने तक दरवाजा मत खोलना.” उन्होंने वन विभाग के एसडीओ को भी 7 बार कॉल किया, मगर कोई जवाब नहीं मिला.

तीन घंटे बाद पहुंची पुलिस
करीब तीन घंटे बाद पुलिस आई. पहले तो वे बाघ हमले में मारे गए किसान का पंचनामा करने लगे, लेकिन भीड़ और भड़क गई. पुलिस पर भी हमला हुआ, एक जवान घायल हो गया, प्रशासनिक गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए. पुलिस गुलाब सिंह को किसी तरह सुरक्षित निकालकर तिरोड़ी थाने ले गई.

ड्यूटी करने के बाद भी निलंबन
लेकिन यहां कहानी ने और भी हैरान कर देने वाला मोड़ लिया. उसी दिन शाम को गुलाब सिंह को व्हाट्सएप पर निलंबन का नोटिस भेज दिया गया. उनका आरोप है कि रेत और शराब माफिया, जो भीड़ में शामिल थे, ने अधिकारियों को अपने पक्ष में कर लिया और उन्हें बलि का बकरा बना दिया.

कर्ज में जिंदगी, इंसाफ की तलाश
निलंबन के बाद गुलाब सिंह आर्थिक संकट में हैं, परिवार का पालन-पोषण करने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है. उन्होंने कई बार सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई और उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.



Source link