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25 साल के अर्जुल तेंदुलकर की सगाई की चर्चा हर तरफ है पर बहुत कम लोग जाते हेै कि उनके पिता महान सचिन तेंदुलकर को 17 साल की उम्र में ही प्यार हो गया था. साल था 1990 में जब सचिन तेंदुलकर की उम्र सिर्फ 17 साल थी …और पढ़ें
प्यार की पिच पर भी बेचे अर्जुन तेंदुलकर से बड़े बल्लेबाज थे सचिन तेंदुलकर सचिन तेंदुलकर और अंजलि तेंदुलकर की लव स्टोरी क्रिकेट की दुनिया की सबसे खूबसूरत और प्रेरणादायक प्रेम कहानियों में से एक मानी जाती है. यह सिर्फ एक महान खिलाड़ी और एक डॉक्टर की कहानी नहीं है, बल्कि यह विश्वास, समर्थन और समर्पण की मिसाल भी है. सचिन तेंदुलकर और अंजलि तेंदुलकर की प्रेम कहानी के शुरुआती दौर किसी बालीवुड के फिल्म की तरह से थे.
साल था 1990 में जब सचिन तेंदुलकर की उम्र सिर्फ 17 साल थी और वे भारत की ओर से इंग्लैंड दौरे पर थे तभी मुंबई एयरपोर्ट पर, जब सचिन की फ्लाइट लैंड हुई, तो अंजलि वहां किसी को रिसीव करने आई थीं तब वहीं पहली बार अंजलि और सचिन ने एक दूसरे को को देखा था. अंजलि ने एक इंटरव्यू में बताया कि जैसे ही उन्होंने सचिन को देखा, उन्हें instantly उससे प्यार हो गयाउन्हें सचिन की मासूमियत और शरमाया हुआ चेहरा बहुत पसंद आया. इसके बाद अंजलि ने सचिन के बारे में जानकारी इकट्ठा करनी शुरू कर दी. वे खुद एक डॉक्टर थीं और एक संभ्रांत पारसी परिवार से थीं, लेकिन क्रिकेट में उन्हें ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी. अंजलि को सचिन का नंबर हासिल करने में थोड़ी मेहनत लगी, लेकिन आखिरकार उन्होंने फोन किया. सचिन को भी अंजलि पसंद आईं, और धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई. उसी दौरान, जब सचिन भारत लौटे, दोनों ने मिलने-जुलने की शुरुआत की. हालांकि, दोनों का बैकग्राउंड काफी अलग था सचिन एक मिडल क्लास मराठी फैमिली से और अंजलि एक अमीर पारसी फैमिली से थीं लेकिन भावनाएं सच्ची थीं .सचिन उस समय एक उभरते हुए क्रिकेटर थे और मीडिया की नजरें उन पर थीं. वे दोनों छुप-छुप कर मिलते थे कभी दोस्तों की मदद से, तो कभी गुपचुप जगहों पर.एक बार अंजलि ने सचिन से मिलने के लिए खुद को एक पत्रकार बनाकर उनके घर पहुंचा दिया था.
काफी सालों के रिलेशन के बाद, 1994 में दोनों की सगाई हुई और फिर 24 मई 1995 को उन्होंने शादी कर लीउस समय सचिन सिर्फ 22 साल के थे. शादी के बाद अंजलि ने अपना मेडिकल करियर छोड़ दिया ताकि वो पूरी तरह सचिन को सपोर्ट कर सकें।उन्होंने हमेशा सचिन को प्रेरित किया, हर मैच में उनका हौसला बढ़ाया और एक मजबूत फैमिली बैकबोन बनकर रहीं. सचिन तेंदुलकर ने जिस तरह से मैदान के अंदर और बाबर के जीवन का संतुलन बनाकर रखा वो अपने बेटे अर्जुन जो अब गृहस्थ जीवन की तरफ कदम आगे बढ़ा रहे है उनसे भी उम्मीद करेंगे कि वो प्यार की पिच और क्रिकेट के पिच पर संतुलन बनाकर रखेंगे.