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धान की फसल में बालियां निकलना किसान के लिए सबसे खुशी और चुनौतीपूर्ण समय होता है. इस दौर में फसल पर ऐसे छिपे हुए खतरे मंडराने लगते हैं, जो पल भर में आपकी मेहनत पर पानी फेर सकते हैं. ज़रा सी लापरवाही पैदावार को आधा कर सकती है.
धान की फसल में जब बालियां निकलने लगती हैं, तो किसान की खुशी के साथ-साथ चिंता भी बढ़ जाती है. इस समय फसल सबसे ज्यादा संवेदनशील होती है और कई तरह के कीट व रोग उस पर हमला करने लगते हैं. अगर सही समय पर पहचान और बचाव न किया जाए, तो पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है.

सहायक संचालक कृषि राम सिंह बागरी लोकल 18 से कहते हैं कि बालियां निकलने का दौर धान के लिए टेस्ट मैच का आखिरी ओवर जैसा है. इस वक्त पांच कीट और रोग जिसमे गांधी बग, तना छेदक, ब्लास्ट, पर्णाच्छद झुलसा और सफेद बाली रोग फसल पर कहर बरपा सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिक तरीकों और सही दवाओं से इन्हें आसानी से रोका जा सकता है.

गांधी बग फसल की बालियों से रस चूसकर दानों को कमजोर और काला कर देता है. इससे पैदावार और क्वालिटी दोनों प्रभावित होती हैं. बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड, मोनोक्रोटोफोस या क्लोरोपायरीफोस का सही मात्रा में छिड़काव करें और खेत में नमी का संतुलन बनाए रखें.

तना छेदक धान के तनों में सुरंग बनाकर बाली को सूखा देता है, जिससे वह सफेद हो जाती है. इसका असर पूरे खेत पर फैल सकता है. इसे रोकने के लिए फेरोमोन ट्रेप लगाएं और कीटनाशकों का समय पर स्प्रे करें, ताकि लार्वा विकसित न हो पाए.

ब्लास्ट रोग एक खतरनाक फफूंदजनित बीमारी है जो पत्तियों, गर्दन और बालियों पर भूरे-काले धब्बे बना देता है. इस रोग से बाली झुक जाती है और दाने अधूरे रह जाते हैं. बचाव के लिए हेक्साकोनाजोल, प्रोपिकोनाजोल या मेनकोजेब का छिड़काव करें.

पर्णाच्छद झुलसा धान की फसल में लगने वाला एक कवक रोग है. यह रोग पत्तियों, तनों और पर्णच्छद (शीथ) को प्रभावित करता है, जिससे दाने नहीं बनते और उपज में काफी नुकसान हो सकता है. इसके लिए मेनकोजेब या हेक्साकोनाजोल का प्रयोग करें और खेत में हवा का अच्छा संचार बनाए रखें.

सफेद बाली रोग अक्सर तना छेदक के प्रकोप के बाद होता है, जिससे बाली पूरी तरह सफेद हो जाती है और दाने नहीं बनते. बचाव के लिए फेरोमोन ट्रेप लगाएं, अंडों के समूह पत्तियों से तोड़कर नष्ट करें साथ ही कीटनाशकों का समय पर छिड़काव करें.

धान की फसल में बालियां निकलते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है. मौसम साफ होने पर ही दवाओं का छिड़काव करें, ओस या बारिश के समय स्प्रे से बचें और हमेशा कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लें. समय पर किया गया बचाव आपके खेत को बंपर पैदावार की गारंटी दे सकता है.