20 फीट की दूरी, लाखों की कमाई! खेतों में लगा दें पपीता की ये वैरायटी, 10 गुना मुनाफा देख चकरा जाएगा दिमाग

20 फीट की दूरी, लाखों की कमाई! खेतों में लगा दें पपीता की ये वैरायटी, 10 गुना मुनाफा देख चकरा जाएगा दिमाग


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Agriculture News: खरगोन अब पपीते की खेती के लिए प्रसिद्ध हो रहा है. जुलाई-अगस्त में पौधारोपण से 10 महीने में फल आना शुरू हो जाता है. पपीते की किस्म ‘रेड लेडी 76’ किसानों को अच्छा मुनाफा दे रही है.

खरगोन. मध्य प्रदेश का खरगोन जिला अब सिर्फ सफेद सोना (कपास) और तीखी लाल मिर्च के लिए ही नहीं, बल्कि बागवानी के लिए भी जाना जाने लगा है. खासतौर पर नर्मदा नदी के किनारे बसे कसरावद क्षेत्र में किसानों ने बड़े पैमाने पर पपीते के बगीचे लगाए हैं. कृषि विभाग के अनुसार, जिले में करीब 40 हजार हेक्टेयर में पपीते की खेती हो रही है, जिससे किसानों को सालभर कमाई हो रही है.

कपास जहां खरीफ सीजन और मिर्च खरीफ-रबी दोनों सीजन में लगाई जाती है, वहीं पपीते की खासियत है कि यह पूरे साल फल देता है. किसानों का कहना है कि पारंपरिक फसलों की तुलना में पपीते की खेती में लागत कम और मुनाफा ज्यादा है. एक हेक्टेयर में पौधे लगाने पर औसतन 40-50 हजार रुपये खर्च आता है, जबकि उत्पादन से किसान डेढ़ से दो लाख रुपये तक सालाना कमा सकते हैं. यही वजह है कि जिले के कई किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं.

पपीते की खेतों के लिए उत्तम किस्म
खरगोन कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. एसके त्यागी बताते हैं कि जुलाई – अगस्त का महीना पपीते की पौध लगाने के लिए सबसे अनुकूल है. पौधे नर्सरी से खरीदकर आसानी से बगीचा शुरू किया जा सकता है. इसके लिए किसान रेड लेडी 76 किस्म का चुनाव कर सकते है, जो जल्दी फल देती है और बाजार में इसकी मांग स्थानीय मंडियों से लेकर बड़े शहरों और अन्य राज्यों तक रहती है.

पपीते की खेती का तरीका
पौधे 20 बाय 20 फीट की दूरी पर लगाएं. हर गड्ढे में सड़ी हुई गोबर खाद और नीम खली मिलाकर मिट्टी भरें. ड्रिप सिंचाई अपनाएं, इससे पानी की बचत होगी.पौधों को गिरने से बचाने के लिए बांस का सहारा दें और रस्सी से बांध दें. पानी ज्यादा न ठहरे, इसका ध्यान रखें. रोग से बचाव के लिए जैविक दवाओं का उपयोग करें. नियमित गुड़ाई और टहनियों की कटाई उत्पादन बढ़ाती है.

3 साल तक मिलेगा उत्पादन
पपीते के पौधों में 10-12 महीने के भीतर फल आना शुरू हो जाता है और एक बार बगीचा तैयार हो जाने के बाद लगातार 2-3 साल तक उत्पादन मिलता रहता है. एक पौधे से औसतन 40-50 किलो पपीता निकलता है. जिले के मंडियों में पपीते की औसत कीमत 15-20 रुपये प्रति किलो तक रहती है, जबकि सीजन में यह कीमत और भी बढ़ जाती है.

Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें

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