Balaghat News: सरकारी बंजर जमीन पर शुरू की नर्सरी, 3 साल में बेचे 23 लाख के पौधे, पर अब फंसीं ये महिलाएं

Balaghat News: सरकारी बंजर जमीन पर शुरू की नर्सरी, 3 साल में बेचे 23 लाख के पौधे, पर अब फंसीं ये महिलाएं


Balaghat News: मध्य प्रदेश के बालाघाट की एक सरकारी बंजर जमीन की कुछ महिलाओं ने मेहनत से तस्वीर बदल दी. लेकिन, 5 साल बाद उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. जिले के वारासिवनी से करीब 6 किलोमीटर दूर स्थित गांव में राशि तेजस्विनी नामक स्व सहायता समूह है, जो 2019 में बना था. इस समूह को उद्यानिकी विभाग की एक नर्सरी में मौका मिला. जब उन्हें वह जमीन मिली तब बंजर थी. लेकिन, समूह ने मेहनत की और अब वहां कई प्रजातियों के पौधे बिकते हैं. पौधे उगते भी हैं. शुरुआत में शासन ने मदद की, लेकिन अब बड़ी चुनौती सामने आ गई है.

ऐसे मिला था ये प्रोजेक्ट
राशि तेजस्विनी समूह खेलन बाई मर्सकोले ने बताया, शुरू में NRLM की मदद से ये प्रोजेक्ट मिला था. इसमें उद्यानिकी विभाग से 2 एकड़ जमीन मिली थी. ये प्रोजेक्ट तीन साल का था, शुरुआती तान साल में नर्सरी तैयार करने के लिए जो लागत आई, उसका खर्च सरकार ने उठाया. इसमें भी 19 महिलाओं को तीन साल तक 100 दिन का रोजगार मनरेगा के तहत मिला. उनकी मजदूरी के पैसे शासन से मिले. इस दौरान महिलाओं को ग्राफ्टिंग, ट्रांसप्लांट सहित कई तरह की बागवानी विधाएं भी सीखी. अब वह नर्सरी उत्पादन में माहिर हो गई है. अब वह खुद ही बिना सहयोग के नर्सरी का संचालन कर रही हैं.

पांच साल में बदली जमीन की तस्वीर
गीता पटले बताती हैं, जब उन्हें जमीन मिली थी, तब वहां पर बेहद कचरा था. यहां पर भूमि सख्त थी. जमीन काफी पथरीली थी. काम करना बेहद मुश्किल था. लेकिन, महिलाओं ने मेहनत की और जमीन तैयार की. दिन रात एक कर उसमें सिंचाई की और खाद डालें और सरकारी जमीन की सूरत बदल दी.

अब असली परीक्षा
नर्सरी चलाने के लिए महिलाओं को शुरुआत में काफी मदद मिली. शुरुआत में कई तरह की सुविधा मिली. इसमें नर्सरी में लगने वाले उपकरण, सिंचाई के लिए बिजली का खर्च का वहन शासन ने किया. लेकिन, अब कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका है. अब सारा जिम्मा समूह पर आ गया है. बीते एक साल से नर्सरी पर होने वाले खर्च की जिम्मेदारी भी महिलाओं की हो गई है. ऐसे में नर्सरी चलाने में महिलाओं का संघर्ष बढ़ गया है.

अब तक बेच दिए एक लाख से ज्यादा पौधे
राशि तेजस्विनी समूह की प्रमुख खेलन बाई मर्सकोले ने बताया कि अब तक उनके समूह ने एक लाख 9 हजार पौधे बेच दिए हैं. इसकी कुल आय लगभग 23 लाख 50 हजार रुपये है. इसमें खरीदारी सरकारी विभाग और कई पंचायत हैं. इसमें अब सिर्फ 12 लाख की वसूली हुई है. वहीं, 11 लाख 50 रुपए सरकारी विभागों और पंचायतों पर बकाया हैं.

जितनी आय उसका आधा उद्यानिकी विभाग को
खेलन बाई ने बताया, अब तक 12 लाख रुपए की वसूली की जा चुकी है. इसमें से आय की आधी रकम उद्यानिकी विभाग को देनी पड़ती है. यानी की अब तक आए 12 लाख में आधे पैसे उद्यानिकी विभाग को गए. इसमें बचे 6 लाख समूह को मिले. वहीं, 2024 के बाद से सरकारी मदद का कॉन्ट्रैक्ट भी खत्म हो गया. ऐसे में नर्सरी में लगने वाली लागत भी समूह के जिम्मे है.

30 रुपए प्रतिदिन आय
खेलन बाई का कहना है कि 6 लाख में से 1 लाख बीते एक साल में लागत लग गई है. शुरू में मनरेगा जैसे मजदूरी मिलती थी, तो काम में उत्साह भी था. लेकिन, अब 5 लाख रुपए भी 19 महिलाओं में बटेंगे. अगर हर दिन महिलाएं यहां काम करने आएं तो, उन्हें 30 रुपए भी एक दिन मजदूरी नहीं मिलेगी. ऐसे में समूह की महिलाएं रोटेशन में आती हैं. 19 महिलाओं में 3-3 महिलाएं रोटेशन में आती हैं. पौधे तैयार करती हैं. इस हिसाब से समूह इस नर्सरी को चला रहा है.



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