चाय की गुमटी तोड़ने से नाराज शख्स ने फांसी लगाने की कोशिश की।
श्योपुर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक चाय वाले ने पेड़ पर फंदा लगाकर फांसी लगाने की कोशिश की। हालांकि वहां मौजूद लोगों ने फौरन उसे नीचे उतारा और जिला अस्पताल लेकर गए।
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ये घटना मंगलवार शाम करीब 6 बजे की है। नगर पालिका और राजस्व विभाग की टीम जिला पंचायत रोड पर नाले पर रखी गईं अवैध गुमटियां हटाने पहुंची थी। यहीं पर बद्री रजक (उम्र 45 साल) चाय की गुमटी लगाते हैं।
प्रशासन ने जब उनकी गुमटी हटाई तो बद्री ने विरोध किया और पेड़ पर चढ़कर गमछे से फांसी लगाने की कोशिश की। ब्रदी अभी अस्पताल में भर्ती है। उसकी हालत खतरे से बाहर है।
बद्री रजक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मेरी यहां 15 साल से दुकान, फिर भी तोड़ रहे थे बद्री रजक ने कहा- अतिक्रमण वाले आए तो मैं गुमटी हटा रहा था, लेकिन उनका कहना था कि फटाफट हटा। हमें जल्दी जाना है। इसलिए मैंने दुखी होकर जान देने की कोशिश की।
बद्री ने आगे कहा- मेरी यहां 15 साल से दुकान है। इसके बाद भी मेरी दुकान को तोड़ा जा रहा है। मैं सीएम मोहन यादव और विधायक बाबू जंडेल से कहना चाहूंगा कि देख लो प्रशासन क्या कर रहा है।
गुमटी टूटने से रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया बद्री रजक ने बताया- मेरे परिवार में पत्नी दुलारी बाई और तीन बेटे नरेंद्र, बलराम और सोनू समेत हम कुल 10 सदस्य हैं। एक बेटी जानकी बाई की शादी हो चुकी है। गुमटी से होने वाली आमदनी से ही पूरे परिवार को पाल रहा हूं। गुमटी टूटने से परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बद्री ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से गुहार लगाई है कि उसे गुमटी लगाने की अनुमति दी जाए या फिर परिवार की जीविका चलाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उसका कहना है कि यदि रोजगार का साधन नहीं मिला तो उसके परिवार के 10 सदस्य भूखे मरने के कगार पर पहुंच जाएंगे।
बद्री के अनुसार, कोरोना काल जैसे कठिन समय में भी मैंने हार नहीं मानी। उस दौरान सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण किया। किसी तरह बच्चों का पेट भरा, लेकिन अचानक गुमटी तोड़े जाने से मेरी दुनिया ही उजड़ गई। रोजगार छिन जाने से मैं मानसिक रूप से टूट गया और आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर हो गया।

फांसी के फंदे पर लटकते देख मौके पर मौजूद लोगों ने बद्री को नीचे उतारा।
लोगों ने नगर पालिका की कार्रवाई का किया विरोध घटना के बाद स्थानीय लोगों में नगर पालिका की कार्रवाई को लेकर नाराजगी है। लोगों का कहना है कि गरीबों की गुमटी उजाड़कर उन्हें बेरोजगार करना संवेदनहीनता है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे परिवारों को उबारने के लिए कोई ठोस कदम उठाए। वहीं सामाजिक संगठनों ने भी बद्री रजक के परिवार की मदद करने की मांग उठाई है।
बेटा बोला- गुमटी हटा दी थी, लेकिन अमले ने तोड़ दी बद्री के बेटे बलराम ने बताया कि उनके पिता की गुमटी पहले ही हटाई जा चुकी थी, लेकिन नगर पालिका का अमला जेसीबी लेकर आया और उनकी गुमटी को तोड़ दिया। बलराम का आरोप है कि इसी सदमे और गुस्से में उनके पिता ने यह कदम उठाया।

घटना की जानकारी लगते ही पत्नी और परिजन अस्पताल पहुंचे।
नगर पालिका सीएमओ बोले- किसी ने उन्हें भड़काया नगर पालिका के सीएमओ आरआर यादव ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कलेक्टर के आदेश पर चल रही है। उन्होंने कहा कि बद्री रजक को नाले पर रखी अपनी गुमटी हटाने के लिए कहा गया था। वह सामान हटा भी रहे थे, लेकिन किसी ने उन्हें भड़का दिया, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया। सीएमओ ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी।