मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डेयरी विकास बोर्ड की बैठक ली।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में दुग्ध संघों के माध्यम से तैयार किए जाने वाले एक जैसे प्रोडक्ट के लिए एसओपी जारी की जाए। साथ ही प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में विटनरी के कोर्स संचालित किए जाएं।
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विटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया के सहयोग से यह सिलेबस शुरू कराए जाएं। दुग्ध उत्पादकों को दूध की कीमत के नियमित और समय पर भुगतान की व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग हो।
मुख्यमंत्री ने ये निर्देश मंगलवार को डेयरी विकास बोर्ड की बैठक में दिए हैं। उन्होंने नगरीय निकायों की बड़ी गो-शालाओं के उन्नयन और प्रबंधन में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से सहयोग लेने की आवश्यकता भी बताई।
मुख्यमंत्री ने कहा-
प्रदेश के सभी दुग्ध संघों में एक समान प्रोडक्ट बनाने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर अपनाना आवश्यक है। दुग्ध उत्पादकों को दूध की कीमत के नियमित और समय पर भुगतान की व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग हो। जिन क्षेत्रों में दुग्ध संघ की पहुंच सीमित है, वहां निजी दूध विक्रेताओं को अपडेट तकनीक का आवश्यक प्रशिक्षण देकर दुग्ध व्यवसाय को प्रोत्साहित और सशक्त किया जाए। प्रदेश के दुग्ध संघ, मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और मध्यप्रदेश कृषि उद्योग निगम में बेहतर समन्वय हो।

सभी दुग्ध संघ कर रहे हैं नवाचार बैठक में जानकारी दी गई कि डेयरी चैन का डिजिटाइजेशन करने के लिए दुग्ध संघों में प्रक्रिया आरंभ की गई है। दुग्ध संकलन के लिए इंदौर दुग्ध संघ द्वारा मोबाइल एप का उपयोग आरंभ किया है। जिससे दुग्ध उत्पादकों को उनके द्वारा प्रदाय किए गए दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी तत्काल प्राप्त होती है।
भोपाल दुग्ध संघ द्वारा शहरी उपभोक्ताओं को दूध की गुणवत्ता की जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दूध का दूध-पानी का पानी अभियान आरंभ किया गया है।
भोपाल दुग्ध संघ ने सांची भात योजना भी आरंभ की है, जिसमें सहकारी समितियों के सदस्यों की बेटियों के विवाह के अवसर पर दुग्ध संघ की ओर से 11 हजार रुपए और वस्त्र, भात के रूप में प्रदान किए जाएंगे। उज्जैन दुग्ध संघ द्वारा पशुधन स्वास्थ्य में सुधार के लिए विशेष अनुदान दिलाया जा रहा है।
2030 तक 26 हजार गांव तक होगा डेयरी नेटवर्क मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि वर्ष 2030 तक प्रदेश के 26 हजार गांवों तक डेयरी नैटवर्क का विस्तार किया जाना है। इससे 52 लाख किलोग्राम दुग्ध संकलन होगा। बढ़े हुए दुग्ध संकलन के समुचित उपयोग के लिए आधुनिकतम दुग्ध प्रसंस्करण अवसंरचना विकसित की जाए। प्रदेश में निर्मित होने वाले दुग्ध उत्पादों की राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग की जाए।