गुरुवार शाम तीन दिवसीय दौरे पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर पहुंचे। केंद्रीय मंत्री ने गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार और लगातार 30 दिन हिरासत में रहने पर PM, CM और मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान वाले बिल को लेकर विपक्ष द्वा
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मेरे पिताजी पर आरोप सिद्ध भी नहीं हुआ था लेकिन उन्होंने नैतिकता का प्रमाण देते हुए तत्कालीन समय में खुद आगे बढ़कर इस्तीफा दिया था। जिस विधेयक पर जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी के जरिए समीक्षा और विचार मंथन होना है कुर्सी पकड़ लोग इसका भी विरोध कर रहे हैं।
बता दें कि सिंधिया ने बिल को लेकर किए जा रहे विरोध पर विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है, सिंधिया का कहना है कि विरोध हर अच्छी चीज और नैतिकता का होता है। इसका विरोध वही तत्व करेंगे जो भारत को उस कालखंड में ले जाना चाहते हैं, जहां भ्रष्टाचार और नैतिकता की कोई जवाब देही ना हो। यह बिल लाने की नौबत ही क्यों आई? क्योंकि कई ऐसे लोग हैं जिन पर गंभीर आरोप है। वह गलत काम करते हुए पाए भी गए हैं, फिर भी कुर्सी पकड़ कर बैठे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि क्या यह समय की मांग नहीं है कि देश में ऐसा विधेयक आए। यदि आपके ऊपर गंभीर आरोप लगाया जाए आप गलत पाए जाएं आप को सलाखों के पीछे रखा जाए फिर भी आप कुर्सी को पकड़ कर रखें है।
मेरे पिताजी पर उस वक्त आरोप भी सिद्ध नहीं हुए थे उस वक्त उन्होंने आरोप लगने के बाद तत्काल त्यागपत्र दिया था। जब सिविल एविएशन दुर्घटना हुई थी, रेलवे में दुर्घटना हुई थी उन्होंने अपना त्यागपत्र दिया था। यह तो हम लोगों का एक नैतिक मूल्य होना चाहिए। किसी का इसको विरोध क्यों करना चाहिए। सभी को इसका समर्थन करना चाहिए। जो लोग विरोध कर रहे हैं वह केवल कुर्सी पकड़ लोग हैं यह इसी श्रृंखला में आते हैं।