हीरामन भूमिया मंदिर पर महंत अर्जुन दास प्रजापति सर्पदंश के बंद काटते हुए।
ग्वालियर में बाबा हीरामन (भूमिया) का 26वां मेला शुक्रवार भाद्रपक्ष कृष्ण की चतुर्दशी पर लगाया गया। सत्यनारायण की टेकरी स्थित इस हीरामन भूमिया मंदिर पर मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के शहरों झांसी, आगरा, धौलपुर से कई लोग यहां आए सर्पदंश, विषबेल क
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ऐसी मान्यता है कि बाबा हीरामन के सामने काटे जाने वाले बंध से सर्पदंश, विष बेल के बंध का रोगी पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है। यह मेला रात भर चलेगा। बस रोगी को इतना करना होता है कि बंध कटवाने से पहले बाबा की पांच परिक्रमा करनी होती है।
झांसी से आई महिला ने अपने नाती आशु वर्मा का बंद कटवाया। 1 साल पहले झांसी में उनके नाती को सांप ने काट लिया था।
बांध काटने से पहले हुआ कन्याभोज
हीरामन भुमिया बाबा का 26 वां वार्षिक मेला समारोह सत्यनारायण की टेकरी, घोसीपुर ग्वालियर पर संपन्न हुआ। इस मेला समारोह में सर्पदंष, बिषबैल और कंठमाल से पीडितों के बंध कांटे गए। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया अतिथि के तौर पर शामिल हुए। वहीं गत दिवस प्रारंभ हुई अखंड के समापन पर हवन पूजन और कन्या भोज का आयोजन हुआ।
ऐसे काटा जाता है बंध
मेला में दूरदराज से सर्पदंष, बिशवैल और कंठमाल के कष्टों से पीड़ित लोग सत्यनारायण की टेकरी स्थित हीरामन भुमिया बाबा के मंदिर पर बड़ी श्रद्धा भक्ति से पहुंचे। ऐसे लोगों द्वारा हीरामन भुमिया मंदिर की परिक्रमा लगाई जाने के बाद मंदिर के महंत अर्जुन प्रजापति भगतजी द्वारा झाड़ा देकर बंध कांटे गए।

सर्पदंश का बंध कटवाने से पहले बाबा हीरामन की परिक्रमा देते लोग।
भाद्रपक्ष कृष्ण की चौदस पर 26वां मेला समारोह
श्री बाबा हीरामन (भूमिया) स्मृति सेवा समिति ग्वालियर द्वारा श्री 1008 बाबा श्री हीरा भूमिया सिद्धपीठ देवस्थान का 26वां मेला समारोह का आयोजन है। पिछले 25 सालों से लगातार यह आयोजन भाद्रपक्ष कृष्ण की चौदस को सत्यनारायण की टेकरी, घोसीपुरा, ग्वालियर पर हुआ है। इस बार 26वां आयोजन रहा है।
मेला और कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बाबा हीरामन भूमिया मंदिर के भगत बाल मुकुंद प्रजापति ने बताया कि इस मेला समारोह में सर्पदंश और विषबेल के बंध काटे गए हैं। कार्यक्रम शुरू होने से पहले भक्त महंत को बैंड-बाजों के साथ लाया गया।
मंदिर पहुंचने के बाद प्रभु राम-जानकी, हनुमान एवं द्वारिकाधीश की पूजा-अर्चना की गई। बाबा हीरामन भूमिया मेले की विशेषता है कि यहां किसी भी तरह के सर्पदंश और विषबेल बंध काटे जाते हैं।
लोक गीतों से की गई बाबा की अर्चना श्रद्धालुओं के बंध खोलने के दौरान मंदिर पर भजन, लोक गीत, कन्हैया गीत गाकर लोक कलाकारों ने बाबा की अर्चना की। इस दौरान ढाक और ढोल बजाए गए। जिसमें बाबा के भक्त झूमते हुए नजर आए।
रामदास घाटी हीरा भूमिया मंदिर पर भी लगा मेला
सत्यनारायण की टेकरी हीरामन बाबा के अलावा रामदास घाटी बाबा हीरा भूमिया के मंदिर पर भी भव्य मेला लगता है। आज के दिन वहां भी सर्पदंश और विषबेल बंध काटे गए हैं। बताया जाता है कि रामदास घाटी हीरा भूमिया मंदिर की स्थापना 85 साल पूर्व महंत सरमनलाल बाथम ने की थी। मंदिर में 1971 में छतरी का निर्माण हुआ था। 1980 में उनके देहांत के बाद उनके बेटे पातीराम बाथम महंत बने।