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Kaan Chidwane Ke Fayde: कान छिदवाने के वैज्ञानिक कारण भी सामने आए हैं. रीवा के आयुर्वेदिक डॉक्टर का दावा है कि कान छिदवाने से कई बीमारियां शरीर से दूर रहती हैं. जानें सब…
कान छिदवाने के पीछे वैज्ञानिक कारण
रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डीन डाॅ. दीपक कुलश्रेष्ठ ने बताया, बचपन में बच्चों के कान छिदवाने के पीछे वैज्ञानिक कारण होता है. हमारे शरीर में विभिन्न स्थानों पर एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जिससे हम शरीर का संतुलन बनाए रख सकते हैं. कुछ बीमारियों पर नियंत्रण पाने की क्षमता इन पॉइंट्स में होती है. ऐसा ही एक पॉइंट कान में होता है, जहां कान छिदवाए जाते हैं. हिंदू धर्म ग्रंथों में भी कर्णवेध संस्कार का उल्लेख है. आयुर्वेद में अस्थमा का इलाज जड़ी बूटियों के साथ-साथ कर्णवेध करके किया जाता है. इससे सांस नली में होने वाली सिकुड़न को कम किया जा सकता है.
डाॅ. दीपक ने आगे कहा, ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों के कर्णवेध संस्कार हुए होते हैं, उन्हें अर्धांगवायू (Hemiplegia), मधुमेह, हर्निया और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है. खास बात ये कि हिंदू धर्म में बच्चों के कान छिदवाना आवश्यक माना जाता है. बच्चे के जन्म के 16वें दिन से लेकर ग्यारह वर्ष तक कान छिदवाए जाते हैं. हांलाकि, किसी भी उम्र कान छिदवाना नुकसानदायक नहीं होता है. बच्चे के नामकरण की तरह ही कान छिदवाने का भी एक महत्वपूर्ण उत्सव माना जाता है.
बच्चों के कान क्यों छिदवाए जाते हैं?
बता दें कि बच्चों के कान छिदवाने के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारणों के साथ-साथ परंपरा भी एक महत्वपूर्ण कारण है. एक्यूपंक्चर थेरेपी के अनुसार, कान छिदवाने से विभिन्न बीमारियों का खतरा कम होता है. बच्चों के बड़े होने पर कान छिदवाने की बजाय बचपन में ही कान छिदवाने से उन्हें कम दर्द होता है और अस्वस्थता भी कम होती है. कुछ माता-पिता बच्चों के कान छिदवाने के पीछे सांस्कृतिक या पारंपरिक मूल्य मानते हैं. अब भारतीयों के साथ-साथ दुनिया के कई माता-पिता अपने बच्चों के कान छिदवाते हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.