ब्रोंको टेस्ट को लेकर मचा बवाल, अश्विन ने दी बड़े खतरे को लेकर चेतावनी

ब्रोंको टेस्ट को लेकर मचा बवाल, अश्विन ने दी बड़े खतरे को लेकर चेतावनी


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Bronco Test controversy: पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने टीम इंडिया के लिए जारी किए जा रहे नए ब्रोंको टेस्ट को लेकर अपनी राय दी है.

ब्रोंको टेस्ट को लेकर मचा बवाल, अश्विन ने दी बड़े खतरे को लेकर चेतावनीब्रोंको टेस्ट को लेकर आर अश्विन ने जताई चिंता
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के लिए जब से फिटनेस मापने के नए टेस्ट को लागू करने की बात सबसे सामने आई है. इसे लेकर अलग अलग बयान सामने आ रहे हैं. पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने कहा है कि जब ट्रेनर बदलते हैं, तो टेस्टिंग का तरीका भी बदल जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि ब्रोंको टेस्ट के आने से क्रिकेटरों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है और इससे चोटें भी लग सकती हैं. अब ब्रोंको टेस्ट के लागू होने के बाद योयो टेस्ट फिटनेस मापने का एकमात्र मानक नहीं रह गया है. ब्रोंको टेस्ट एरोबिक सहनशक्ति और खिलाड़ी की कार्डियोवैस्कुलर क्षमता को चुनौती देने के लिए डिजाइन किया गया है.

एड्रियन ले रॉक्स, जिन्होंने सोहम देसाई की जगह स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच के रूप में ली है, ने तेज गेंदबाजों से जिम-आधारित प्रशिक्षण पर निर्भर रहने के बजाय अपने रनिंग वर्कलोड को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का अनुरोध किया है. इंग्लैंड सीरीज के सभी पांच मैचों में केवल मोहम्मद सिराज ही खेले, जिससे अन्य तेज गेंदबाजों की फिटनेस पर सवाल उठे.

जसप्रीत बुमराह और ऋषभ पंत
अपने यूट्यूब चैनल ‘अश की बात’ पर अश्विन ने समझाया कि जब ट्रेनर बदलते हैं और अपने तरीके लाते हैं तो क्रिकेटरों को अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. अश्विन ने कहा, “मैंने हमेशा ट्रेनरों से पूछा है. जब ट्रेनर बदलते हैं, तो टेस्टिंग का तरीका बदल जाता है. ट्रेनर बदलते हैं, तो ट्रेनिंग की योजनाएं बदल जाती हैं. जब ऐसा होता है, तो खिलाड़ियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.”

अश्विन ने कहा, “एक खिलाड़ी के रूप में अगर आप ट्रेनिंग की प्यानिंग बार-बार बदलते हैं तो यह खिलाड़ियों के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है. कई मामलों में इससे चोटें भी लग सकती हैं. मैं इसे नकार नहीं रहा हूं, इससे चोटें लगी हैं. 2017 से 2019 तक मैं अपनी ट्रेनिंग योजना की खोज कर रहा था. मैंने इसे सहा है. सोहम देसाई इसके बारे में सब कुछ जानते हैं.”

क्या है ये ब्रोंको टेस्ट

रग्बी और फुटबॉल में इस्तेमाल होने वाला ब्रोंको टेस्ट एक खिलाड़ी की एरोबिक सहनशक्ति और रिकवरी क्षमता का आकलन करता है. इस टेस्ट को बिना ब्रेक के 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर की पांच शटल रन के साथ पूरा करना होता है. सभी पांच सेटों को पूरा करने से कुल 1,200 मीटर की दूरी तय होती है, और समय रिकॉर्ड किया जाता है; तेज समय उच्च फिटनेस स्तर को दर्शाता है.

अश्विन ने आगे कहा, “मैं बस कुछ सवाल उठाना चाहता हूं. एक खिलाड़ी के तौर पर मुश्किलें हमेशा ही बनी रहती है. मैं सही में कुछ निरंतरता चाहूंगा. यह देना महत्वपूर्ण है. मैं बस यही चाहता हूं कि जब भी कोई नया ट्रेनर आए, तो उसे पिछले ट्रेनर के साथ छह महीने से एक साल तक काम करना चाहिए ताकि हैंडओवर दिया जा सके.”

Viplove Kumar

15 साल से ज्यादा वक्त से खेल पत्रकारिता से सक्रिय. Etv भारत, ZEE न्यूज की क्रिकेट वेबसाइट में काम किया. दैनिक जागरण वेबसाइट में स्पोर्ट्स हेड रहा. ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, क्रिकेट और फुटबॉल वर्ल्ड कप कवर किया. अक्टूब…और पढ़ें

15 साल से ज्यादा वक्त से खेल पत्रकारिता से सक्रिय. Etv भारत, ZEE न्यूज की क्रिकेट वेबसाइट में काम किया. दैनिक जागरण वेबसाइट में स्पोर्ट्स हेड रहा. ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, क्रिकेट और फुटबॉल वर्ल्ड कप कवर किया. अक्टूब… और पढ़ें

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