DAP से तगड़ी खाद, खपत थोड़ी…असर ज्यादा, मिट्टी को नहीं होगा नुकसान, पैदावार के साथ दोगुना मुनाफा

DAP से तगड़ी खाद, खपत थोड़ी…असर ज्यादा, मिट्टी को नहीं होगा नुकसान, पैदावार के साथ दोगुना मुनाफा


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NPK SSP Fertilizer Benefits: इस बार डीएपी की कमी ने जरूर चिंता बढ़ाई है, लेकिन राहत की बात ये कि अब ऐसे विकल्प मौजूद हैं जो मिट्टी को जरूरी पोषण देने के साथ पैदावार और मुनाफे दोनों को दोगुना करने की क्षमता रखते…और पढ़ें

Agri Tips: खेती के मौसम में जब-जब डीएपी की किल्लत बढ़ती है, किसान सबसे ज्यादा परेशान नजर आते हैं. ज़्यादातर किसान डीएपी को ही सुपर खाद मानते हैं, लेकिन अब समय बदल चुका है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि डीएपी के अलावा भी ऐसे विकल्प मौजूद हैं जो न सिर्फ मिट्टी की उर्वरकता बनाए रखते हैं, बल्कि पैदावार बढ़ाकर किसानों की आमदनी भी दोगुनी करने की क्षमता रखते हैं. सरकार भी किसानों को इन खादों के इस्तेमाल की ओर प्रोत्साहित कर रही है, ताकि डीएपी पर निर्भरता कम हो सके.

सरकार ने बढ़ाया विकल्पी खादों पर फोकस
डीएपी की कमी से चिंतित किसानों के लिए राहत की खबर ये है कि सरकार अब एनपीके और सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) जैसे खादों को बढ़ावा दे रही है. ये दोनों ही खाद न केवल लागत को कम करने में मदद करते हैं, बल्कि मिट्टी को जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं. कृषि विभाग लगातार गांव-गांव जागरूकता अभियान चला रहा है, जिसमें किसानों को बताया जा रहा कि ये डीएपी की वैकल्पिक खाद से कैसे खेतों की उर्वरकता बनी रहती है. उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है.

जिला विपणन अधिकारी का बड़ा बयान
लोकल 18 से बातचीत में जिला विपणन अधिकारी नेहा पीयूष तिवारी ने बताया, डीएपी का सबसे बेहतर विकल्प 20.20.0.13, 12.32.16 और 16.16.16 जैसी खाद हैं. किसानों को अब केवल डीएपी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है, बल्कि वैकल्पिक फॉस्फेटिक उर्वरक का उपयोग करके वे बेहतर नतीजे हासिल कर सकते हैं.

SSP और एनपीके के फायदे
विशेषज्ञों के मुताबिक, एसएसपी डीएपी से सस्ता होता है और इसमें सल्फर व कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो डीएपी में अनुपस्थित रहते हैं. वहीं, एनपीके खाद फसल की आवश्यकता के अनुसार नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित मिश्रण देती है. अगर सीएसपी को यूरिया और पोटाश के साथ मिलाकर खेतों में डाला जाए तो यह डीएपी और एनपीके दोनों की जरूरतों को पूरा कर सकता है.

किसानों के लिए जरूरी संदेश
कृषि विभाग के फील्ड अधिकारी, ग्राम सेवक और आरईओ लगातार किसानों को समझा रहे हैं कि डीएपी ही एकमात्र विकल्प नहीं है. वैकल्पिक खाद का इस्तेमाल न केवल पैदावार बढ़ा सकता है बल्कि मिट्टी की सेहत भी लंबे समय तक बनाए रख सकता है. ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे डीएपी की कमी से घबराने के बजाय बाजार में उपलब्ध इन खादों को अपनाकर खेती को लाभकारी बनाएं.

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DAP से तगड़ी खाद, खपत थोड़ी असर ज्यादा, मिट्टी रहेगी सुरक्षित, मुनाफा दोगुना



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