भगवान महाकालेश्वर का 18 अगस्त का एक CCTV वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में भगवान को किया गया भांग का श्रृंगार अचानक बिखरकर गिर गया था। वीडियो वायरल होते ही अलग-अलग तरह की चर्चाएं होने लगीं। श्रृंगार गिरने के बाद महाकाल मंदिर प्रशासक ने भ
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विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल का मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का खास केंद्र है। भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में भगवान महाकाल का हर रोज भांग से आकर्षक श्रृंगार किया जाता है। ये श्रृंगार पर्व के अनुसार स्वरूप किया जाता है।
18 अगस्त को राजसी सवारी निकल रही थी। मंदिर में सवारी के आगमन की तैयारी चल रही थी। इस दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जो रात 8 बजे का है। जिसमें भगवान महाकाल को हुआ भांग का श्रृंगार एकाएक गिर जाता है।
इसके बाद वहां मौजूद पंडे, पुजारियों ने तत्काल उसे ठीक किया। भगवान के श्रृंगार गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जिसके बाद दो दिन पहले महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने वीडियो के आधार पर मंदिर के पुजारी प्रदीप गुरु को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
नोटिस में तय मात्रा से अधिक भांग के उपयोग का लिखा हुआ है। नोटिस में लिखा है कि भांग तय मात्रा से ज्यादा उपयोग क्यों की गई। नोटिस का दो दिन में जवाब देने को कहा गया है। भगवान महाकाल के मंदिर में भांग के श्रृंगार गिरने का और भांग के बिखरने का 1 मिनट के CCTV फुटेज सामने आया है। श्रृंगार को मंदिर में मौजूद पुजारी, पुरोहितों ने ठीक कर दिया था।
प्रदीप गुरु बोले- नमी के कारण भांग गिरी
18 अगस्त को भांग का श्रृंगार करने वाले प्रदीप गुरु ने बताया कि कहा कि बारिश के कारण गर्भगृह में नमी हो रही थी। शिव लिंग पर पंचामृत के कारण नमी थी। जिसके चलते भांग शिवलिंग पर टिकी नहीं और चिकनाई होने के कारण भांग गिर गई। हमने मंदिर समिति द्वारा तय मात्रा में ही भांग लगाई थी। ये तो प्राकृतिक है, नोटिस मिला है उसका जवाब एक दो दिन में देंगे।
मंदिर समिति के पास भांग की मात्रा पर निगरानी के लिए कोई साधन नहीं
श्री महाकाल मंदिर के पुजारी यश गुरु ने कहा- ये एक सामान्य और प्राकृतिक व्यवस्था है। मंदिर में गर्भ गृह में भगवान का श्रृंगार शिवलिंग शरण को रोकने के लिए जारी की गई न्यायालय द्वारा गाइड लाइन के अनुसार ही किया जाता है। श्रृंगार में उपयोग की जाने वाली सामग्री में भांग, चंदन, मेवे व अन्य की शुद्धता की जांच के बाद ही उसे मंदिर में भगवान को अर्पित किया जाता है।
ये कोई पहली बार नहीं है। श्रृंगार का अचानक से बिखरना कभी-कभी गर्भ गृह का टेम्प्रेचर और बाहर के मौसम के अनुसार ऐसी स्थिति बनती है और भगवान का श्रृंगार टिक नहीं पाता। नमी और उमस के कारण ऐसी स्थिति बनती है। मंदिर समिति ने भांग की मात्रा तो तय कर रखी है लेकिन उसकी निगरानी के लिए कुछ नहीं किया। वीडियो में देखकर कैसे अंदाजा लगाया जा सकता है कि श्रृंगार अधिक भांग का था।
3 किलो भांग की मात्रा तय
मंदिर में भस्म आरती, संध्या आरती और शयन आरती के दौरान भगवान का भांग से श्रृंगार किया जाता है। जिसमें लगभग 3 किलो भांग भगवान को अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए औषधि युक्त भांग से श्रृंगार भी किया जाता है और लड्डू का भोग भी भगवान को लगाया जाता है। भगवान ने जब समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश के बाद विष पिया, तब भी भगवान को भांग औषधि रूप में देकर शीतलता प्रदान की गई थी।
जानिए भांग तैयार कैसे होती है
महाकाल मंदिर के ठीक सामने महाकाल भांग घोटा नामक दुकान के संचालक विजय साहू ने बताया कि आबकारी विभाग के लाइसेंस की फीस चुकाकर एक-एक किलो के बैग में पत्ते के रूप में भांग दुकानों पर पहुंचती है। इसके बाद इसे उबाला जाता है और फिर ग्राइंडर में पीसकर धोते हैं।
इसके बाद गीली और सुखी भांग तैयार होती है। जिससे गोली, सूखा पावडर, ठंडाई के रूप में लोग सेवन करते हैं। दुकानों पर भांग एक्साइज डिपार्टमेंट के द्वारा पहुंचती है। इसका लाइसेंस लेने के बाद ही भांग की बिक्री की जा सकती है। भांग के लिए मध्य प्रदेश में एक मात्र वेयर हाउस खंडवा में है। यहीं से प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में भांग को बिक्री के लिए भेजा जाता है।