11 मुल्कों की पुलिस नहीं इसे ढूंढ रही तीन राज्यों की यूनिवर्सिटी, कर ही दिया है कुछ ऐसा!

11 मुल्कों की पुलिस नहीं इसे ढूंढ रही तीन राज्यों की यूनिवर्सिटी, कर ही दिया है कुछ ऐसा!


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Medical Student Research: डॉक्टर बनने का सपना रखने वाले आकाश को एक दिन अचानक ख्याल आया और उसने ऐसी खोज कर डाली कि आज तीन राज्यों की यूनिवर्सिटी इस रिसर्च में लगी है. आइए जानते हैं पूरी कहानी.

अनुज गौतम, सागर: एक बच्चा बड़ा होकर डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था और डॉक्टर बनने के लिए मन लगाकर खूब पढ़ाई भी करने लगा. यहां तक की 12वीं में अच्छे अंक हासिल कर प्री मेडिकल की तैयारी में जुट गया, लेकिन फिर अचानक पढ़ाई लिखाई सब कुछ छोड़कर उसने अपनी छोटी सी जमीन पर खेती शुरू कर दी, और इस पर उन्होंने 5 साल की रिसर्च में ऐसा मॉडल तैयार किया. जिसे दुनिया भर में डंका बजा दुबई से लेकर सिंगापुर तक इसकी चर्चाएं हुई. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक सम्मानित कर चुके. और अब इस किसान के मॉडल पर तीन राज्यों के विश्वविद्यालय रिसर्च कर रहे हैं. इसमें बुंदेलखंड की महाराजा छत्रसाल यूनिवर्सिटी, महाराष्ट्र की नांदेड़ यूनिवर्सिटी और राजस्थान की उदयपुर यूनिवर्सिटी के छात्र इस मॉडल  पीएचडी कर रहे हैं.

दरअसल, सागर के चौरसिया परिवार में जन्में आकाश के पिता शहर के संजय नगर में करीब एक एकड़ की जगह में परम्परागत रूप से पान की खेती करते थे और पान की खेती करने के लिए इसमें नेट हाउस टाइप के बरेजे सदियों से लगता आ रहे हैं. पान को प्रोटेक्ट करने के लिए एक अलग तरह का ढांचा तैयार किया जाता था. इसे वह देखते आ रहे थे इसके अलावा उन्होंने यह भी देखा कि जब किसी के पास जगह कम होती है तो वह एक के ऊपर एक घर बना लेता है जिन्हें हम मल्टी स्टोरेज बिल्डिंग कहते हैं. तो आकाश ने सोचते हुए एक जमीन पर एक समय में पांच फसले लेने का प्लान तैयार किया और फिर इसमें एक बार ही सिंचाई करते एक बार ही निदाई करनी पड़ती है यानी कि लागत बीज खाद पानी समय एक बार और कमाई बार-बार होती है एक एकड़ से वह 1 साल में 5 से 7 लाख तक का मुनाफा आराम से कमा लेते हैं.

इसके बाद आकाश चौरसिया ने 16 एकड़ की कपूरिया में जमीन खरीदी और फार्म हाउस बनाकर जैविक खेती शुरू की यहां पर वह करीब 7 एकड़ की जगह में मल्टी लेयर फार्म में खेती कर रहे हैं यहां वह एक मॉडल एक एकड़ का ऐसा भी बनाए हुए हैं जिसमें हर साल 40 से 60 तरह की फसलों की खेती कर रहे हैं जिन्हें देखने के लिए देश भर के अलग-अलग कोनों से किसान पहुंचते हैं.

मल्टी लेयर फार्म में उन्होंने स्ट्रक्चर को इस तरह से तैयार किया है कि उसमें पांच तरह की फैसले बड़े आराम से एक ही जगह पर मैंने हो रही है इसमें पूरे खेत में बांस के 6- 6 फीट के डंडे लगते हैं इनमें जीआई तार का जाल बनाते हैं और इस पर सूखी घास डालकर स्ट्रक्चर तैयार करते हैं.

मल्टी लेयर फार्म में खेती करने के लिए वह जमीन के अंदर हल्दी अदरक आलू जैसी फसल लगाते हैं, इसके बाद मिट्टी पर भाजी वाली जैसे धनिया पत्ती पलक मेंथी चौरई यानी पत्ते वाली फसल लगाते इसी के साथ फल वाली जैसे बैगन भिंडी वाली फसल को लगाते इसके साथ में जो डंडे लगे होते हैं उसमें लता वाली फसल करेला परमल गिलकी लोकी जैसी फसल लगाते और एक वह फसल होती है जो स्ट्रक्चर को पार करते हुए ऊपर निकल जाती है जिसमें पपीता मुनगा  जैसी फसल शामिल होती है यानी कि एक स्ट्रक्चर पर बिल्डिंग की तरह एक के ऊपर एक पांच तरह की फसले उगा लेते हैं.

इस तरह की मॉडल में 10 15 दिन से ही इनकम शुरू हो जाती है जिसमें रोजाना की इनकम अलग और जो इकट्ठी फसल की इनकम होती है वह सेफ इनकम के रूप में अलग मिल जाती है.

मल्टी लेयर फार्मिंग के जनक आकाश चौरसिया कहते हैं कि प्री मेडिकल की तैयारी करते समय हमने देखा कि डॉक्टर बन के हम बीमारियों का इलाज तो कर देंगे लेकिन जो नई-नई बीमारियां आएगी उसका क्या करेंगे. इसको लेकर पता चला कि खान-पान की वजह से यह सारी बीमारियां हो रही हैं तभी हमने विचार किया अगर हम समाज को अच्छा भोजन देने में सफल हुए तो डॉक्टर की जरूरत ही नहीं पड़ेगी और यहां से जिंदगी में नया मोड़ आया और खेती पर काम शुरू किया इस पर 3 विश्वविद्यालय मॉडल पर रिसर्च कर रही है.

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11 मुल्कों की पुलिस नहीं, तीन राज्यों की यूनिवर्सिटी ढूंढ रही, आखिर क्यों?



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