भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर गणेश स्थापना।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर इस बार 27 अगस्त, बुधवार को गणेश स्थापना होगी। इस दिन चित्रा नक्षत्र, शुभ योग और विष्टि करण का संयोग रहेगा। तुला राशि का चंद्रमा भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया कि इस दि
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सुबह से शाम तक शुभ मुहूर्त
चौघड़िया अनुसार बुधवार को सुबह से शाम तक कई शुभ मुहूर्त रहेंगे। इनमें प्रात: 6:11 से 7:41 तक ‘लाभ’, 7:41 से 9:11 तक ‘अमृत’, 10:41 से 12:11 तक ‘शुभ’, दोपहर 3:11 से 4:41 तक ‘चंचल’ और 4:41 से 6:11 बजे तक पुन: ‘लाभ’ का समय रहेगा। इन शुभ चौघड़ियों में गणेश स्थापना करना श्रेष्ठ माना गया है।
दस दिनों तक दस स्वरूपों की साधना
गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक दस दिनों तक गणपति के दस स्वरूपों की साधना का विशेष महत्व बताया गया है। प्रतिदिन पार्थिव गणेश की प्राण प्रतिष्ठा कर षोडशोपचार पूजन, मोदक का नैवेद्य अर्पण और 21 दूर्वा के साथ नाम जप करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
पहले दिन गणाधिप, दूसरे दिन उमा पुत्र, तीसरे दिन अघनाशन, चौथे दिन विनायक, पांचवें दिन ईश पुत्र, छठे दिन सर्वसिद्धि प्रदायक, सातवें दिन एकदंत, आठवें दिन इभवक्र, नौवें दिन मूषक वाहन और दसवें दिन कुमार गुरु नाम से पूजन करना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस विधि से पूजन करने पर विघ्न दूर होते हैं और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं।
विवाह में बाधा दूर करने का उपाय
पं. डब्बावाला ने बताया कि जिन कन्याओं के विवाह में अड़चनें आ रही हैं, उनके लिए हरिद्रा गणेश की स्थापना शुभ मानी गई है। ब्रह्म मुहूर्त में हल्दी से गणेश प्रतिमा बनाकर 10 दिन तक ‘विघ्ननाशक गणेश स्तोत्र’ या ‘गणपति स्तोत्र’ का पाठ करने से विवाह में आ रही बाधाओं का समाधान होता है।
भद्रा का पाताल लोक में निवास
इस वर्ष स्थापना के समय तुला राशि में चंद्रमा रहेगा। मान्यता है कि तुला राशि के चंद्रमा में भद्रा का निवास पाताल लोक में होता है और पाताल लोक निवासिनी भद्रा को धन देने वाली माना गया है। ऐसे में इस योग में की गई गणेश साधना विशेष रूप से धन-लाभकारी रहेगी।