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Ganesh Tulsi Katha: गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. पुराणों में भगवान गणेश से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं. इनमें से एक है गणपति और तुलसी की कहानी. जानें सब…
कब घर-घर विराजेंगे गणेश जी
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 26 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 54 मिनट से होगी. वहीं, इसका समापन 27 अगस्त को लदोपहर 03 बजकर 44 मिनट पर होगा. पंचांग को देखते हुए गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त को शुरू होगा और इसी दिन गणेश प्रतीमा की स्थापना की जाएगी.
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार गणेशजी ध्यान कर रहे थे. तपस्या में लीन थे. गणेशजी सुंदर वस्त्र, कंठ माला पहन कर बैठे थे. उसी समय तुलसी माता का वहां से निकलना हुआ. उन्होंने जैसे ही गणेश जी को सुंदर रूप में देखा तो वह मोहित हो गईं. उसके बाद तुलसी ने भगवान गणेश का ध्यान भंग कर दिया. जैसे ही गणेश जी का ध्यान भंग हुआ तो देवी तुलसी ने गणेश से विवाह का प्रस्ताव रखा. लेकिन, गणेश जी ने उन्हें कहा मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता. यह सुनने के बाद तुलसी क्रोधित हो गईं. कहा, तुमने मेरी बात नहीं मानी. मैं तुम्हे श्राप देती हूं कि तुम्हारी दो पत्नियों होंगी. फिर गणेश जी महाराज भी क्रोधित हो गए जानिए आगे क्या हुआ?.
तुलसी के बाद भगवान गणेश नें दिया श्राप
तुलसी ने जब भगवान गणेश को श्राप दिया तो इस पर श्री गणेश ने भी तुलसी को श्राप दिया. तुम्हारा विवाह एक असुर से होगा. एक राक्षस की पत्नी होने का श्राप सुन तुलसी ने गणेश भगवान से माफी मांगी. गणेश भगवान ने कहा, तुम्हारा विवाह राक्षस से होगा. जब तुलसी ने क्षमा याचना की तो भगवान गणेश ने कहा, तुम भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की प्रिय होने के साथ-साथ कलयुग में जीवन और मोक्ष देने वाली होगी. लेकिन, मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना अशुभ होगा. इसलिए गणेश पूजा मे तुलसी वर्जित बताई गई है.